सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa

महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा

DevanagariHindipublished296 पृष्ठ

पृष्ठ 154, कुल 296 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 154

( 167 )
...गणः = सुप्रसिद्ध अच्छे गुणों का समूह । प्रतिपक्षकालः = शत्रुओं के लिए
मृत्यु । तिग्मांशुवंशतिलकः = सूर्य वंश का भूषण भूत । त्रिदशेन्द्रकल्पः = इन्द्र
से कुछ कम । आज्ञावशात् = राम के आदेश के अनुरोध से । अखिलभूपरि-
रक्षणस्थः = सारी भूमि के पालन के अधिकार में स्थित । श्रीमान् = प्रशस्त
लक्ष्मी वाले । उदारकलभेभसमानयानः = प्रशस्त ३० वर्ष के हाथी के समान
गति वाले । उपगतः = आ गए हैं । लब्धप्रसादशपथे = पादुका रूप कृपा और
१४ वर्ष बाद राज्य ले लूँगा रूपी सौगन्ध को ग्रहण करने वाले । मयि
संनिवृत्ते = मेरे राम के पास से लौटने पर । प्रजानयनबुद्धिमनोभिरामम् =
प्रजा के नेत्र और बुद्धि के लिए सुन्दर बने (राम को) ।
अन्वय—अधुना हृदयस्थितशोकाग्निशोषिताननम् आगतं सुमन्त्र
दृष्ट्वा एवं मे मनः आकुलम् आसीत् (५)
अन्वय—प्रख्यातसद्गुणगणः प्रतिपक्षकालः तिग्मांशुवंशतिलकः त्रिद-
शेन्द्रकल्पः आज्ञावशात् अखिलभूपरिरक्षणस्थः श्रीमान् उदारकलभेभसमान-
यानः (भरतोऽस्ति) । (६)
अन्वय—लब्धप्रसादशपथे मयि संनिवृत्ते अयम्, अत्रभवान् सुमन्त्रः
पूर्वम् आर्यनिरीक्षणार्थम् गत्वा प्रजानयनबुद्धिमनोभिरामम् 'रामं' दृष्ट्वा इह
आगतः किम् । (७)
हिन्दी अर्थ
(कंचुकी का प्रवेश)
काञ्चुकीय—अरे, यहा कौन है ? काञ्चन तोरण द्वार पर कौन उपस्थित
है ?
(प्रवेश करके)
प्रतिहारी—आर्य, मैं विजया हूँ । क्या किया जाए ?
काञ्चुकीय—विजये, कुमार भरत से कहो कि राम से मिलने के लिए
जनस्थान गए हुए श्री सुमन्त्र वापस लौट आए हैं ।
प्रतिहारी—आर्य, क्या तात सुमन्त्र सफल मनोरथ होकर आए हैं ।
काञ्चुकीय—हे देवी, मुझे पता नहीं ।
अभी आए हुए सुमन्त्र को देख कर मेरा मन व्याकुल हो रहा है ।
उनका मुख हृदय मे विद्यमान दुःख रूपी अग्नि से सूखा हुआ
है । (५)