प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)
Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa
महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा
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जिस प्रकार गोपाल के बिना गाएँ सुरक्षा के अभाव में नष्ट हो
जाती है, उसी प्रकार राजा के बिना भी प्रजाएँ निश्चित ही
विनाश को प्राप्त करती हैं। (२३)
[भरत]—प्रजा मेरे पीछे-पीछे आए।
[सुमं]त्र—राज्याभिषेक को छोड़ कर आप कहाँ जायेगे ?
[भर]त—अभिषेक ? अभिषेक तो इन देवी को दीजिए।
[सुमं]त्र—आप कहाँ जायेगे ?
[भर]त—जहाँ वे लक्ष्मण के प्रिय राम है, मै वही पर जाऊँगा। अयोध्या
उनके बिना अयोध्या नही है। वही अयोध्या है, जहाँ राम है। (२४)
(सब निकल जाते है)
तीसरा अंक समाप्त।