प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - विमला संस्कृत-हिन्दी टीका एवं सविस्तार व्याख्या सहित)
Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa
महाकवि भास (व्याख्याकार: डॉ. श्रीकृष्ण कुमार) द्वारा
पृष्ठ 11, कुल 296 में से
संदर्भ में पढ़ें( 8 )
(5) कर्णभार
(6) दूतवाक्य
(7) दूतघटोत्कच
(8) ऊरुभंग
(9) बालचरित
(10) प्रतिज्ञायौगन्धरायण
(11) स्वप्नवासवदत्त
(12) चारुदत्त
(13) अविमारक
कथावस्तु की दृष्टि से इन नाटकों के 5 वर्ग बनाए गए हैं—
(1) रामकथा वाले (प्रथम दो नाटक)
(2) महाभारत की कथा वाले (तीसरे से आठवें तक)
(3) कृष्ण कथा वाला (नवी संख्या का नाटक) .
(4) उदयन कथा के (दसवा व ग्यारहवा नाटक)
(5) लोककथा वाले (अन्तिम दो नाटक) !
भास की कृतियों की प्रामाणिकता
इस संबंध में तीन मत हैं—
प्रथम मत—कतिपय आलोचकों ने नाटकचक्र के रूपकों को केरलीय
रंगमंच के अभिनेता चाक्यारों की रचना माना है। उनका मत है कि यदि यह
नाटकचक्र भास द्वारा प्रणीत होता तो प्रस्तावना या स्थापना में भास का नाम
अवश्य आता। इनकी पाण्डुलिपियां केरल के अतिरिक्त अन्य प्रान्तों में भी
अवश्य प्राप्त होतीं। रीति ग्रन्थों में जो स्वप्नवागवदत्तम् के उदाहरण आये
हैं, उनका भी वर्तमान नाटक में अभाव है। प्रतिज्ञा व स्वप्न नाटकों में
विवाह के लिए "सम्बन्ध" शब्द का प्रयोग हुआ है, जो आज भी चाक्यारों
में इसी अर्थ में प्रयुक्त है।
द्वितीय मत—कुछ विद्वानों ने इन तेरह नाटकों को दो भागों में
विभक्त किया है और विभिन्न काल की रचनाएं स्वीकार किया है। ये स्वप्न
और प्रतिज्ञा आदि नाटकों को तो भास की कृति मानते हैं तथा अन्य रूपकों
को नहीं। इनके अनुसार भास के नाटकों में परिवर्द्धन तथा संशोधन कर किसी
केरल कवि ने इन्हें रंगमंच के योग्य बनाया है। नाटकचक्र पर हुए समीक्षण