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सर्वकोश
प्रश्नोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

प्रश्नोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Prashna Upanishad Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

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७२ प्रश्नोपनिषद् [ प्रश्न ४


तदक्षरं वेदयते यस्तु सोम्य

स सर्वज्ञः सर्वमेवाविवेशेति ॥ ११ ॥

हे सोम्य ! जिस अक्षरमें समस्त देवोंके सहित विज्ञानात्मा प्राण और भूत सम्यक् प्रकारसे स्थित होते हैं उसे जो जानता है वह सर्वज्ञ सभीमें प्रवेश कर जाता है ॥ ११ ॥

| विज्ञानात्मा सह देवैश्चाग्न्या- | जिस अक्षरमें अग्नि आदि |
| दिभिः प्राणाश्चक्षुरादयो भूतानि | देवोंके सहित विज्ञानात्मा तथा |
| पृथिव्यादीनि संप्रतिष्ठन्ति | चक्षु आदि प्राण और पृथिवी आदि |
| प्रविशन्ति यत्र यस्मिन्नक्षरे | भूत प्रतिष्ठित होते अर्थात् प्रवेश |
| तदक्षरं वेदयते यस्तु सोम्य | करते हैं, हे सोम्य—हे प्रियदर्शन ! |
| प्रियदर्शन स सर्वज्ञः सर्वमेव | उस अक्षरको जो जानता है वह सर्वज्ञ |
| आविवेशाविशतीत्यर्थः ॥ ११ ॥ | सभीमें आविष्ट अर्थात् प्रविष्ट हो जाता है ॥ ११ ॥ |


इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यश्रीमद्गोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्य-
श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रश्नोपनिषद्भाष्ये
चतुर्थः प्रश्नः ॥ ४ ॥