प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)
Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary
मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २२२ )
योगिनी स्त्री चौसठ देवी,
योनि स्त्री. मंडल विशेष ।
र
रंगभूमि स्त्री. गर्भगृह के सामने पांचवां नीचा मंडप,
नृत्य मंडप ।
रजत न. चांदी, धातु विशेष ।
रत्नकूट पु. केसरी जाति का सोलहवां प्रासाद ।
रत्नगर्भा स्त्री. पंद्रहवी संवरणा ।
रत्नशीर्ष पु. वैराज्यादि ११वां प्रासाद ।
रत्नसम्भवा स्त्री २४वी संवरणा ।
रथ पु. विशेष प्रकार की गाडी, कोने के समीप का दूसरा
कोना, फालना विशेष ।
रथा स्त्री. प्रासाद की जाती विशेष ।
रथिका स्त्री. भद्र का गवाक्ष, आला ।
रन्ध्र न. प्रवेश द्वार ।
रम्या स्त्री. छठ्ठी संवरणा ।
रवि पु. बारह की संख्या, सूर्य ।
रश्मि पु. किरण ।
रस पु. छह की संख्या ।
राक्षस पु. आय से व्यय अधिक जानने की संज्ञा ।
राजगृह न. राजमहल ।
राजपुर न. राजधानी का शहर, राजनगर ।
राजमन्दिर न. राजमहल ।
राजमार्ग पु. सार्वजनिक आम रास्ता ।
राजसेन न. मण्डप की पीठ के ऊपर का थर ।
राजहंस पु. केशरी जाति का २२ वां प्रासाद ।
राजांश पु. क्षेत्रफल का नाप विशेष ।
राम पु. तीन की सख्या (राम, परशुराम और बलराम)
रासभ पुं. खर आय का नाम ।
राहुमुख न. शेषनागचक्र का मुख ।
रिक्ता स्त्री नींव की चौथी शिला, ४, ६ और १४
तिथि ।
रीति स्त्री. पीत्तल, धातु विशेष ।
रुचक पुं. समचोरस स्तंभ ।
रुद्र पुं. ग्यारह की संख्या, वास्तुदेव ।
रुद्रदास पु. वास्तुदेव,
रूपकण्ठ पुं. गुम्बद के उदय में कर्णदर्दोरिका के ऊप
का थर.
रूपस्तंभ पुं. द्वारशाखा के मध्य का स्तंभ.
रेखा स्त्री. खांचा, कोना ।
रोग पुं. वास्तुदेव ।
रोहिणी स्त्री. चौथा नक्षत्र ।
रौप्यज न. चांदी का बना हुआ ।
ल
लक्ष्मीनारायण पुं. विष्णुदेव ।
लक्ष्य त. उद्देश्य, चिह्न ।
लतालिगोद्भव न. मंडल विशेष ।
लतिन पुं. प्रासाद की एक जाति ।
लतिना स्त्री. प्रासाद की एक जाति ।
लय न. मकान, गृह ।
लाटी स्त्री. स्त्रीयुगलवाली प्रासाद की जंघा ।
लिङ्गोद्भव न. वास्तु मंडल विशेष ।
लोह पुं. धातु विशेष, लोहा ।
व
वक्त्र न. मुख ।
वज्र न. हीरा ।
वज्रक पु. केसरी जाति का १६ वां प्रासाद ।
वज्री स्त्री. ओषधि विशेष, गडूची ।
वट पुं. वृक्ष विशेष, बरगद, वड़,
वत्स पु. आकाशीय कल्पित एक संज्ञा ।
वपुष् न. शरीर ।
वराटका स्त्री. प्रासाद की एक जाति ।
वराल पुं. ग्रास, जलचर जीव विशेष, मगर ।
वरुण पुं. पश्चिम दिशा का दिक्पाल, वास्तुदेव ।
वर्द्धमान पुं. प्रतिकर्णवाला स्तंभ ।
वलभी स्त्री प्रासाद की एक जाति ।
वल्कल पुं. औषधि विशेष ।
वसु पुं. आठ की संख्या, आठ देव विशेष ।
वह्नि पुं. अग्निकोण का दिक्पाल, अग्नि, वास्तुदेव,
चित्रक ओषधि ।
वह्निभ न. कृत्तिका नक्षत्र ।