प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)
Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary
मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २१६ )
पञ्चगव्य न. गाय का दूध, दही, घी, मूत्र और गोबर।
पञ्चत्रिंशत् सं० ३५वें भाग की संज्ञा।
पञ्चदेव पु. ब्रह्मा, विष्णु, सूर्य, ईश और सदाशिव
ये पांच देवों का समूह, उत्सङ्ग के देव।
पञ्चाशत् न. पचास की संख्या।
पट्ट पु. पाषाण का पाट।
पट्टभूमिका स्त्री. ऊपर की धूप घुंडी का।
पट्टशाला स्त्री. दलान, बरामदा।
पत्ताहा स्त्री. छाया।
पत्त्रशाखा स्त्री. द्वार की प्रथम शाखा का नाम।
पद न. भाग, हिस्सा।
पद्मक पु. कमल दल।
पद्मभव पु. कमल से पैदा होने वाला प्रासाद।
पद्मरत्न न. मणियों के आधार वाला घर, सभा।
पद्मराग पु. हस्ती जाति का १८ वां प्रासाद।
पद्मशिला स्त्री. गुम्बज के ऊपर की मण्डलशिला, यह
नीचे से गोल होती है।
पद्मा स्त्री. पद्मशिला, आरम्भ की सवरणा।
पद्माक्ष पु. पद्माक्ष (राजा) के देव।
पद्मिनी स्त्री नवशाखा वाला द्वार।
पद्मासन न. देव के बैठने का स्थान, पीठिका।
पर्जन्य पु. वास्तुदेव, ध्वजा का देव।
पर्यङ्क पु. पलंग, खाट।
पर्यन्त न. प्रासाद की दो मुंडो का मध्य भाग।
पर्वत पु. रत्न का देव।
पल्यङ्क पु. पलंग, खाट।
पाद पु. चरण, चौथा भाग।
पापराक्षसी स्त्री. वास्तुचक्र के वायु कोणाकी देवी।
पार्वती स्त्री. कलश के देव।
पार्श्व पु. न. एक तरफ, समीप।
पालव न. छज्जा के ऊपर छाद्य का एक थर।
पिण्ड वि. जाडाई, मोटाई।
पितामह पु. ब्रह्मा।
पितृ पु. वास्तुदेव, पूर्वज, पितर देव।
पितृपति पु. यम, दक्षिण दिशा का दिक्पाल।
पिप्पल पु. वृक्ष, पाकर, विजयन।
पिशाच पु. क्षेत्रगणित के आय और व्यय दोनो बराबर
जानने की संज्ञा।
पीठ न. प्रासाद की खुरसी, आसन।
पीलीपीच्छा स्त्री. वास्तुचक्र के ईशान कोण की देवी।
पुनर्वसु पु. सातवां नक्षत्र।
पुर न. गाव, शहर।
पुराण न. अठारह की संज्ञा।
पुरुष पु. प्रासाद का जीव, जो सुवर्ण का पुरुष बनाकर
आमलसार मे पलंग पर रखा जाता है।
पुष्पंज् पुं, वास्तुदेव।
पुष्पकंठ पुं, दासा, अंतराल।
पुष्कर न. जलाशय का मंडप, वलाएक।
पुष्पगेह न. पूजनगृह।
पुष्पदन्त पुं. वास्तुदेव।
पुष्पराग न. पुखराज, रत्न विशेष।
पुष्पिका स्त्री. गुम्बद के पर बनी हुई प्रथम सवरणा।
पुष्य न. आठवा नक्षत्र।
पूतना स्त्री. वास्तुचक्र के नैऋत्य कोण की देवी।
पृथिवीजय पुं. केसरी जाति का बारहवा प्रासाद।
पृथिवीधर पु. वास्तुदेव।
पृथु वि. विस्तार, चौडाई।
पेट } न. पाट आदि के नीचे का तल।
पेटक }
पौर पु. दूसरा व्यय का काक।
पौरुष पुं. प्रासाद पुरुष सबंध की विधि।
पोली स्त्री. प्रासाद की पीठ के नीचे भीडू का थर।
पौष्ण न. २७ वां रेवती नक्षत्र।
प्रणाल न. पानी निकलने की नाली, परनाला।
प्रतिकर्ण न कोनेके समीप का दूसरा कोना।
प्रतिभद्र न. मुखभद्र के दोनो तरफ के साचे।
प्रतिरथ पुं. कोनेके समीप का चौथा कोना।
प्रतिष्ठा स्त्री. देवस्थापन विधि।
प्रतोली स्त्री. पोल, प्रासाद आदि के आगे तोरण वाला
दो स्तंभ।
प्रत्यङ्ग न. शिखर के कोनेके दोनो तरफ के लंबा
चतुर्थांश मानका श्रृंग।