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प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary

मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा

DevanagariHindipublished278 पृष्ठ

पृष्ठ 267, कुल 278 में से

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पृष्ठ 267

( २१९ )
देवतायतन पु. देवो की पंचायत ।
देवनक्षत्र न. देवगणवाले नक्षत्र ।
देवपुर. देवनगर ।
देवसुन्दरी स्त्री. चौथी संवरणा ।
दैर्ध्य वि. लबाई ।
दोला स्त्री. झूला । हिंडोला ।
दौवारिक पु. वास्तुदेव ।
द्राविड पु. प्रासाद की एक जाति ।
द्राविडी पु. अधिक शृंगोवालो प्रासाद की दीवार,
जंघा ।
द्वादश सं. बारह की संख्या ।
द्वार न. दरवाजा ।
द्वारपाल पु. द्वारका रक्षक, चौकीदार ।
द्विरष्ट सं. सोलह की संख्या ।
ध
धनद पु. उत्तर दिशा का अधिपति कुवेर देव ।
धनुः न. नववी राशि, धनुष्य ।
धरणी स्त्री. गर्भगृह के मध्य नीव मे स्थापित नवमी
शिला ।
धराधर पु. कंपिलो मंडप के देव ।
धिष्ण्य न. २७ की संख्या । नक्षत्र
धूम पु. दूसरा आय ।
ध्रुव पु. उत्तर दिशा का एक तारा, ध्रुव तारा ।
ध्वज पु. पहला आय, ध्वजा ।
ध्वजा स्त्री. पताका, झंडा, ध्वजा ।
ध्वजादंड पुं. ध्वजा रखने का दंड, जिसमे ध्वजा
लटकाई जाती है ।
ध्वजाधार पु. ध्वजादंड रखने का कलावा
ध्वांक्ष पु. आठवां आय, काक ।
न
नकुलीश पु. ऊर्ध्वरेता महादेव ।
नगर न. गांव, शहर ।
नन्द पु. नव की संख्या ।
नन्दन पु. केसरी जाति का तीसरा और वैराज्यादिका
दूसरा प्रासाद ।
नन्दशालिक पु. केसरी जाति का चौथा प्रासाद ।
नन्दा स्त्री. प्रथम शिला, जो ईशान अथवा अग्नि कोण
में प्रथम स्थापित किया जाता है ।
नन्दिन् पु. महादेव का वाहन, बैल, सांठ ।
नन्दिनी स्त्री. पंचशाला वाला द्वार, जाड्यकुम्भका देव,
दूसरी संवरणा ।
नन्दी स्त्री. काणी, भद्र के पास की छोटी कोनी ।
नन्दीश पु. केसरी जाती का पांचवा प्रासाद ।
नर पु. नरथर, पुरुष की आकृति वाली पट्टी ।
नर्त्तकी स्त्री. नाच करतो हुई पुतली ।
नलिका स्त्री. नववी संवरणा ।
नवनाभि पु. यज्ञमंडल विशेष ।
नवमङ्गल पु. वैराज्यादि १६ वां प्रासाद ।
नष्टच्छन्द पु. जिसकी तलविभक्ति बराबर न हो ।
नाग पु. वास्तुदेव. हाथी ।
नागकुल पु. भीट्ट थर के देव ।
नागर पु. प्रासाद की एक जाति ।
नागरा स्त्री. उपर का अर्थ देखो ।
नागरी स्त्री. रूपविनाकी सादी जंघा ।
नागवास्तु पु.न. शेषनाग चक्र, राहुमुख ।
नाटयेश पु. नटराज ।
नाभि स्त्री. मध्यभाग ।
नाभिच्छन्द पु. दो जाति की मिश्र आकृति वाली छत ।
नाभिवेध पु. गर्भवेध ।
नारायणी स्त्री. आठवी संवरणा ।
नाल न. नाली, पानी नीकलने का परनाला ।
नाली स्त्री. देखो उपर का अर्थ ।
नासक न. कोना ।
निरन्धार पु. विना परिक्रमावाला प्रकाश मय प्रासाद ।
निर्गम पु. बाहर नीकलता हुआ भाग ।
निशाकार पु. आमलसार का देव, चंद्रमा ।
निःस्वन पु. शब्द ।
नृत्य पु. नृत्यमंडप, रंगमंडप ।
नैर्ऋत पु. नैर्ऋत्य कोणके अधिपति दिक्पाल ।
प
पक्षिराज पु. केसरी जाति का २३ वां प्रासाद,
पञ्च सं. पांच की संख्या ।