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सर्वकोश
प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary

मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा

DevanagariHindipublished278 पृष्ठ

पृष्ठ 264, कुल 278 में से

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पृष्ठ 264

( २१५ )
कपोताली } स्त्री. प्रासाद के दीवार का पाचवा थर,
कपोतिका } केवल थर ।
कर पु. हस्तनक्षत्र, हाथ ।
करोटक पु. गुंबज ।
कर्ण न. कोना, पट्टी, सिंहकर्ण ।
कर्णक न. कणी, जो थरो के ऊपर नीचे पट्टी रखी
जाती है ।
कर्णगूठ पु. छीपा हुआ कोना, बद कोना ।
कर्णदर्दरिका स्त्री. गुंबज के उदय मे नीचला थर ।
कर्णसिंह पु. प्रासाद के कोने पर रखा हुआ सिंह ।
कर्णाली स्त्री. कणी, जाड्यकुंभा के ऊपर का थर ।
कर्णिका स्त्री. थरो के ऊपर नीचे की पट्टी, छोटा
कोना, कोणा और प्ररथ के बीच मे कोणी की
फालना ।
कर्म न. समूह वाचक, शृंगो का समूह ।
कलश पु. मडोवर का तीसरा थर, शिखर के ऊपर
रखा हुआ कलश ।
कलशाण्डक न. कलश का पेट ।
कला स्त्री. रेखा विशेष, सोलह की सख्या ।
कलास्र पु. सोलह कोना ।
कपाय पु. ओषधि विशेष ।
कास्य न. कासा, धातु विशेष ।
कामदपीठ न. गज आदि हथयरा से रहित पीठ ।
कारा स्त्री. जेल
काल पु वासुदेव, समय ।
कालन्दी स्त्री. यमुना देवी ।
काष्ठ न. लकडी ।
किसुर पु. किन्नरदेव, पुष्ठकंठ के देव ।
कीर्त्तिवक्त्र न. ग्रासमुख ।
कीर्त्तिस्तंभ पु. विजयस्तम, तोरणवाले स्तम ।
कीलक न. कील, खूटा
कुज पु मगनग्रह ।
कुञ्चिता स्त्री. प्रासाद के डैण्ट भाग के मान की कोली
कुण्ड न. यज्ञकुण्ड, जलकुण्ड ।
कुबेर पु. उत्तर दिशा का दिक्पाल ।
कुंभ पु. मंडोवर का दूसरा थर, कलश ।
कुंभिका स्त्री. स्तंभ के नीचे की कुंभी ।
कुलतिलका स्त्री. पाचवी सवरणा ।
कूटच्छाद्य न. छज्जा ।
कूर्म पु सोना चादी का कछुआ, जो नीव मे रखा
जाता है ।
कूर्म्मशिला स्त्री. कछुए के चिह्नवाली धारणी शिला ।
केसरित् पु. पाच शृंगवाला प्रासाद ।
कैलास पु. केसरी जाति का ग्यारहवा और वैराज्य
जाति का ठारहवा प्रासाद ।
कोटर पु-न. पोलाण ।
कोटि स्त्री करोड सख्या, रेखा की एक भुजा
कोट् पु. किला, दुर्ग ।
कोल न. गुबज के उदय मे गजतालु थर के ऊपर का
थर ।
कोविद पु पंडित, ज्ञानी ।
कोष्ठागार न. कोठार ।
क्षण न. खड, विभाग ।
क्षिति स्त्री. पाटका देवता, पृथ्वी ।
क्षितिवल्लभ पु वैराज्य जातिका सोलहवा प्रासाद ।
क्षिप्त न. लटकती हुई छत ।
क्षीर न. दूध ।
क्षीरार्णव पु. समुद्र, वास्तुग्रन्थ विशेष.
क्षेत्र न. प्रासादतल ।
क्षेत्रपाल पु अमुक मर्यादित भूमिका देव ।
क्षोभणा स्त्री. कोनी
ख
खण्ड पु विभाग, मजिल, खड ।
खर पु छट्ठा ग्राय.
खरशिला स्त्री. जगती के दाशा के ऊपर और भीट
के नीचे बनी हुई प्रासाद को धारण करनेवाली
शिला ।
खल्वशाखा स्त्री. द्वार की नव शाखाओ मे चोथी और
आठवी शाखा ।
खात न. मकान की नीव ।