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सर्वकोश
प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary

मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा

DevanagariHindipublished278 पृष्ठ

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पृष्ठ 208

ऽष्टमोऽध्यायः १५६
शाखयोश्चन्द्रसूर्यौ च त्रिमूर्त्तिश्चोत्तरङ्गके ।
उदुम्बरे स्थितं यक्ष-मश्विनावद्ध'चन्द्रके ॥७५॥
द्वारशाखाओ मे चंद्र और सूर्य, उत्तरंग मे त्रिमूत्ति (ब्रह्मा, विष्णु और शिव), देहली
मे यक्षों और अर्धचंद्र (शंखावटी) मे दोनो अश्विनीकुमारो का न्यास करे ॥७५॥
कौलिकायां धराधारं क्षितिं चोत्तानपट्टके ।
स्तम्भेषु पर्वतांश्चैव-माकाशं च करोटके ॥७६॥
कीलिका मे धराधर, उत्तानपट्ट (बड़ा पाट) में क्षिति, स्तंभ मे पर्वत और गूंबद मे
आकाश, इन देवो का न्यास करे ॥७६॥
मध्ये प्रतिष्ठयेद् देवं मकरे जाह्नवीं तथा ।
शिखरस्योरुशृङ्गेषु पञ्च पञ्च प्रतिष्ठयेत् ॥७७॥
ब्रह्मा विष्णुस्तथा सूर्य ईश्वरी च सदाशिवः ।
शिखरे चेश्वरं देवं शिखायां च सुराधिपम् ॥७८॥
गर्भगृह मे स्वदेव, मगर मुखवाली नाली मे गंगाजी, शिखर के उरुशृंगो मे ब्रह्मा,
विष्णु, सूर्य, पार्वती और सदाशिव, इन पांच २ देवो का न्यास करके पूजन करे । शिखर मे
ईश्वर देवका और शिखामे सुराधिप (इन्द्र) का न्यास करे ॥७७-७८॥
ग्रीवायामम्बरं देव-मएडके च निशाकरम् ।
पद्माक्षं पद्मपत्रे च कलशे च सदाशिवम् ॥७६॥
शिखर की ग्रीवा में अंबरदेव, शृंगो मे तथा आमलसार मे निशाकर (चंद्रमा),
पद्मपत्र और पद्मशिला मे पद्माक्ष देव, और कलश मे सदाशिव, इन देवो का न्यास करे ॥७९॥
सद्यो वामस्तथाघोर-स्तत्पुरुष ईश एव च ।
कर्णादिगर्भपर्यन्तं पञ्चाङ्गे तान् प्रतिष्ठयेत् ॥८०॥
इति स्थावर प्रतिष्ठा ।
सद्य, वामन, अघोर, तत्पुरुष और ईश, इन पाच देवो का कोने से लेकर गर्भपर्यन्त
पांच अंगों मे (कर्ण, प्रतिरथ, रथ, प्रतिभद्र और मुखभद्र मे) न्यास करे ॥८०॥
प्रतिष्ठितदेव का प्रथम दर्शन—
प्रथमं देवतादृष्टे-दर्शयेदन्तर्हितम् ।
विप्रकुमारिकां वास्तु-ततो लोकान् प्रदर्शयेत् ॥८१॥