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प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)

Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary

मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा

DevanagariHindipublished278 पृष्ठ

पृष्ठ 175, कुल 278 में से

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पृष्ठ 175

१२८ प्रासादमण्डने
तीन २ चौकी की तीन लाईन ऐसा नव चौकी वाला शान्त नाम का मंडप कहा जाता है ॥६॥
शान्तमंडप के आगे एक चौकी हो तो नंद ७, शान्तमंडप के आगे चौकी न हो,
परन्तु दोनों बगल में एक २ चौकी हो तो सुदर्शन ८, शान्तमंडप के आगे और दोनों बगल में
एक २ चौकी हो तो रम्यक ९, तीन २ चौकी वाली चार लाईन हो तो सुनाभ १०, सुनाभ
मंडप के दोनो बगल में एक २ चौकी हो तो सिंह ११, और सिंह मंडप के आगे एक चौकी
हो तो सूर्यात्मक नामका मंडप १२ कहा जाता है । इन मंडपों के ऊपर गूमट अथवा संवरणा
किया जाता है ।
गूढस्याग्रे प्रकर्त्तव्या नानाचतुष्किकान्विताः ।
चतुरस्रादिभेदेन बितानैर्बहुभिर्युताः ॥२४॥
इति द्वादशत्रिकमंडपाः ।
पुष्पकादि मण्डपो.
[१ सुभद्र, ३२ स्तंभ] [२ श्यामभद्र, ३४ स्तंभ] [३ सिंहक, ३६ स्तंभ] [४ पद्माधिक, ३८ स्तंभ] [५ कर्णिकार, २० स्तंभ]
[६ हर्षण, २२ स्तंभ] [७ सुग्रीव, २४ स्तंभ] [८ विमानभद्र, २६ स्तंभ]
[९ मानव, २८ स्तंभ] [१० नंदन, ३० स्तंभ] [११ कुल्य, ३२ स्तंभ]
[१२ शत्रुमर्दल, ३४ स्तंभ] [१३ सुमेरु, ३६ स्तंभ] [१४ विशालाक्ष, ३८ स्तंभ]