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सर्वकोश
प्रमाणवार्तिकम् (आचार्य धर्मकीर्ति - मनोरथनन्दि वृत्ति सहित बौद्ध न्याय महाग्रन्थ)

प्रमाणवार्तिकम् (आचार्य धर्मकीर्ति - मनोरथनन्दि वृत्ति सहित बौद्ध न्याय महाग्रन्थ)

Pramanavarttika of Acharya Dharmakirti with Manorathanandin Commentary

आचार्य धर्मकीर्ति (वृत्ति: मनोरथनन्दी, सम्पादक: स्वामी द्वारिकादास शास्त्री) द्वारा

DevanagariSanskritpublished532 पृष्ठ

पृष्ठ 499, कुल 532 में से

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पृष्ठ 499

? No, तत्रात्यक्षंwithत्य! But wait, is it a typo for तत्राध्यक्षं? It has a त्joined toय=त्य! Wait, look at त्यinनित्यorसजात्यनपेक्षाणाम्. It has त्य! Here it clearly is printed तत्रात्यक्षं.) Line 28: तत्रापि चान्यव्यावृत्तिः २७८Line 29:तत्रापि धूमाभासा धीः २१६Line 30:तत्रापि व्यापको धर्मो १३०Line 31:तत्रापि साध्यधर्मस्य ३८१Line 32:तत्राप्यदृश्यात् पुरुषात् ४५०Line 33:तत्राप्यदृष्टमाश्रित्य २२०`

Wait, look at line 10 left:
Is it तस्यागातिफलाः or तस्यागामिफलाः?
Wait! In Tattvasaṅgraha k. 786/something: "तस्यागामिफलाः सर्वाः"!
Let's look at the letter in line 10:
त स्या गा ति or मि?
It has a loop with a dot? No, it has `