प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
पृष्ठ 233, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंPlate VI.
लिपिपत्र छठा.
कुशनवंशी राजाओं के समय के मथुरा, सारनाथ आदि के लेखों से.
(ई. स. की पहिली व दूसरी शताब्दी).
मथुरा के लेखों से.
अ अ अ आ इ ई उ उ ए ए ए ओ क ख ख ख ग ग
[तदनुरूप ब्राह्मी वर्ण]
ग घ च च च च च छ ज ज झ ट ठ ड ढ ढ ण ण
[तदनुरूप ब्राह्मी वर्ण]
ण ण ण त थ द द ध न न न प ब भ भ भ म म
[तदनुरूप ब्राह्मी वर्ण]
य य र र र ल ल व व श श ष ष ष स स स स
[तदनुरूप ब्राह्मी वर्ण]
ह ह ह ह ळ जा जा णा णा ता वा रा षा णि थि वी सी
[तदनुरूप ब्राह्मी वर्ण]
दु तु तु दू गु गृ वृ $\frac{हि}{हे}$ $\frac{तो}{गो}$ खो ग्ग द्य द्ध र्य्य स्ति स्य
[तदनुरूप ब्राह्मी वर्ण]
सारनाथ के लेखों से. चार गांव के लेख से.
णि दि वु च छ द्धे व्य स्फ . ग ह ण्ड य्य य्य स्य स्य
[तदनुरूप ब्राह्मी वर्ण]
[चारगांव अभिलेख, पंक्ति १ — ब्राह्मी लिपि: महाराजस्य राजातिराजस्य देवपुत्रस्य हुविष्कस्य सं...]
[चारगांव अभिलेख, पंक्ति २ — ब्राह्मी लिपि]
[चारगांव अभिलेख, पंक्ति ३ — ब्राह्मी लिपि]
[चारगांव अभिलेख, पंक्ति ४ — ब्राह्मी लिपि]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri