प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
DevanagariHindipublished318 पृष्ठ
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१८८ प्राचीनलिपिमाला.
वर्ष ३६५ दिन, १५ घड़ी, ३१ पल और ३० विपल का होता है, अतएव बार्हस्पत्य संवत्सर सौर
वर्ष से ४ दिन, १३ घड़ी और २६ पल के करीब छोटा होता है जिससे प्रति ८५ वर्ष में एक संवत्सर
क्षय हो जाता है. इस चक्र के ६० वर्षों के नाम ये हैं—
१ प्रभव, २ विभव, ३ शुक्ल, ४ प्रमोद, ५ प्रजापति, ६ अंगिरा, ७ श्रीमुख, ८ भाव, ९ युवा,
१० धाता, ११ ईश्वर, १२ बहुधान्य, १३ प्रमाथी, १४ विक्रम, १५ वृष, १६ चित्रभानु, १७ सुभानु,
१८ तारण, १९ पार्थिव, २० व्यय, २१ सर्वजित्, २२ सर्वधारी, २३ विरोधी, २४ विकृति, २५ खर,
२६ नंदन, २७ विजय, २८ जय, २९ मन्मथ, ३० दुर्मुख, ३१ हेमलंब, ३२ विलंबी, ३३ विकारी,
३४ शार्वरी, ३५ प्लव, ३६ शुभकृत्, ३७ शोभन, ३८ क्रोधी, ३९ विश्वावसु, ४० पराभव, ४१ प्लवंग,
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