प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)
Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)
पृष्ठ 75, कुल 86 में से
संदर्भ में पढ़ेंअनुग्रह
अनयत्पृथुतरशकटं निजनिकटं वा कृतापराधमपि।
कण्ठाश्लेषविशेषादवधीद्बाल्येऽसुरं कृष्णः ॥२२८॥
शकटासुर बड़ा अपराधी था तथापि भगवान् कृष्णने उसे अपने
निकट बुला लिया [अर्थात् उसे मारकर अपना धाम दिया],
और बाल्यावस्थामें ही उन्होंने [तृणावर्त] असुरको गला घोंटकर
मार डाला।
यमलार्जुनौ तरू उन्मूल्योलूखलगतश्चिरं खिन्नौ।
रिङ्गन्नङ्गणभूमौ स्वमालयं प्रापयन्नृहरिः ॥२२९॥
चिरकालसे दुःखी यमलार्जुन-वृक्षोंको ऊखलमें बँधे-बँधे ही
अपने घरके आँगनमें रेंगते हुए श्रीकृष्णने उखाड़कर अपने लोक-
को भेज दिया।
नित्यं त्रिदशद्वेषी येन च मृत्योर्वशीकृतः केशी।
काकः कोऽपि वराको बकोऽप्यशोकं गतो लोकम् ॥
उन श्रीकृष्णचन्द्रने ही देवताओंसे नित्य द्वेष करनेवाले
केशीका वध किया और [उन्हींकी कृपासे] बेचारे तुच्छ
काकासुर और बकासुर भी शोकरहित लोकोंको गये।
गोगोपीगोपानां निकरमहिं पीडयन्तमतिवेगात्।
अनघमघासुरमकरोत्पृथुतरमुरगेश्वरं भगवान्॥२३१॥
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