सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished86 पृष्ठ

पृष्ठ 19, कुल 86 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 19

विषय-निन्दा
हैं। [ अतः इन दो पक्षोंका निराकरण हो जानेसे इस शब्दका
तात्पर्य दूसरे पक्ष ( संसार ) में ही है किन्तु इस ] द्वितीय पक्षमें
भी यह वेदवाक्य पुत्रहीन पुरुषोंकी पुत्रेष्टि आदि यज्ञोंमें प्रवृत्ति
करानेके लिये ही है ।
नानाशरीरकष्टैर्धनव्ययैः साध्यते पुत्रः ।
उत्पन्नमात्रपुत्रे जीवितचिन्ता गरीयसी तस्य ॥३८॥
नाना प्रकारके शारीरिक कष्ट और धनादिके व्ययसे तो पुत्र
उत्पन्न होता है और उत्पन्न होनेपर भी उसके जीवित रहनेकी बड़ी
चिन्ता लगी रहती है ।
जीवन्नपि किं मूर्खः प्राज्ञः किंवा सुशीलभाग्भविता ।
जारश्चौरः पिशुनः पतितो द्यूतप्रियः क्रूरः ॥३६॥
जीवित रहनेपर भी न जाने वह मूर्ख, बुद्धिमान्, सुशील,
जार, चोर, चुगलखोर, पतित, जुआरी या क्रूर कैसी प्रकृतिका
निकले ?
पितृमातृबन्धुघाती मनसः खेदाय जायते पुत्रः ।
चिन्तयति तातनिधनं पुत्रो द्रव्याधधीशताहेतोः॥४०॥
माता, पिता और बन्धुओंका घात करनेवाला पुत्र सदैव
उनके चित्तको दुःखित करनेवाला ही होता हैं। वह धन एवं
११

प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित) · पृष्ठ 19, कुल 86 में से · SarvaKosh