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सर्वकोश
प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

प्रबोधसुधाकर (हिन्दी अनुवाद सहित)

Prabodhasudhakara with Hindi Translation - Gita Press

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished86 पृष्ठ

पृष्ठ 10, कुल 86 में से

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पृष्ठ 10

प्रबोधसुधाकर
यद्यपि भगवान् ऐसे हैं तथापि अध्यात्मशास्त्रोंके सारोंसे तथा
हरि-चिन्तन और कीर्तनाभ्यासादिसे उनका कथन किया ही
जाता है।
कॢप्तैर्बहुभिरुपायैरभ्यासज्ञानभक्त्याद्यैः ।
पुंसो विना विरागं मुक्तेरधिकारिता न स्यात् ॥ ४ ॥
सम्पादन किये हुए अभ्यास, ज्ञान और भक्ति आदि नाना
उपायोंसे भी बिना वैराग्यके मनुष्यको मुक्तिका अधिकार नहीं होता।
वैराग्यमात्मबोधो भक्तिश्चेति त्रयं गदितम् ।
मुक्तेः साधनमादौ तत्र विरागो वितृष्णता प्रोक्ता ॥ ५ ॥
वैराग्य, आत्मज्ञान और भक्ति—मुक्तिके ये तीन साधन
बतलाये गये हैं, इनमें तृष्णाहीनतारूप वैराग्य ही प्रथम है।
सा चाहंममताभ्यां प्रच्छन्ना सर्वदेहेषु ।
तत्राहंता देहे ममता भार्यादिविषयेषु ॥ ६ ॥
वह वितृष्णता समस्त देहधारियोंके भीतर अहंता और
ममतासे छिपी हुई है। उनमेंसे अहंता देहमें होती है और ममता
स्त्री-धन आदि विषयोंमें हुआ करती है।
देहः किमात्मकोऽयं कः सम्बन्धोऽस्य वा विषयैः।
एवं विचार्यमाणेऽहंताममते निवर्तेते ॥ ७ ॥
'यह देह किससे बना है और इसका विषयोंसे क्या सम्बन्ध
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