प्रबन्धचिन्तामणि (आचार्य मेरुतुङ्ग - राजा भोज, विक्रमादित्य, सिद्धराज जयसिंह एवं मालवा इतिहास सटीक)
Prabandhachintamani of Acharya Merutunga
आचार्य मेरुतुङ्ग (अनुवादक: मुनि जिनविजय / हजारीप्रसाद द्विवेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६ ] प्रबन्धचिन्तामणि [ प्रथम प्रकाश
सं० १५५ (१०६६) चैत्र सुदी ६ गुरुवारको, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और मकर लग्नमें, दुर्लभराज
नामक उसका भाई राज्यपर अभिषिक्त हुआ। इसने पत्तन में व्ययकरण (कचहरी), हस्तिशाला और घटी-
गृह युक्त सात तल्लेवाला धवलगृह (राजप्रासाद) बनवाया। अपने भाई वल्लभराज के कल्याणार्थ मदनशङ्कर
प्रासाद बनवाया और दुर्लभसर नामक सरोवर भी बनवाया। इस तरह बारह वर्ष इसने राज्य किया।]
[ प्रबन्धचिन्तामणिकी इस A सञ्ज्ञावाली प्रतिमें चौलुक्य वंश के इन राजाओंका कालक्रम आदि कुछ भिन्न क्रमसे लिखा
हुआ मिलता है जिसका भी सङ्ग्रह करना ऐतिहासिक दृष्टिसे कुछ उपयोगी होगा ऐसा समझ कर हमने इन कोष्ठकान्तर्गत
कण्डिकाओंमें उसे मुद्रित किया है। यह कालक्रम सूचक पाठ भी चाय डोके कालक्रम सूचक उस द्वितीय पाठके समान अपूर्ण
और अव्यवस्थित है। हमारा अनुमान होता है कि ग्रन्थकारने पहले पहल जब यह कालक्रमके बतलानेवाले उल्लेखों और खवतोंका
सङ्ग्रह करना शुरू किया होगा और वृद्ध जनोंसे तथा अन्यान्य लेखोंसे इस विषयके प्रमाण एकत्रित करने प्रारंभ किये होंगे, उस
समयका लिखा हुआ जो प्राथमिक असंशोधित आदर्श रहा होगा उस परसे यह A संज्ञक आदर्श (तथा उसके समान जातीय अन्य
आदर्श) की प्रतिलिपि हुई होगी और इसीलिये इनमें यह असंशोधित कालक्रमवाला पाठ वैसाका वैसा नकल होता हुआ चला
आया हुआ होना चाहिए। संशोधित पाठ वही है जो ऊपर मूलमें दिया गया है।]
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३३) इसके बाद [ A D प्रतिके अनुसार 'सं० १०५ (१०७८) ज्येष्ठ सुदी १२ मंगलवारको
अश्विनी नक्षत्र, मकर लग्नमें '] श्री भीम नामक अपने पुत्रका राज्याभिषेक करके स्वयं तीर्थोपासनाकी वास-
नासे बाणारसी के प्रति प्रस्थान किया। मालवक मण्डल में पहुँचनेपर वहाके महाराजा मुञ्जने रोक कर
इस प्रकार कहा कि-' छत्रचामरादि राज-चिन्होंका परित्याग करके कार्पटिक (संन्यासी) की भाँति आगे जाओ,
नहीं तो युद्ध करो'। बीच ही में उत्पन्न ऐसा इसे धार्मिक विघ्न समझकर, यह वृत्तान्त भीमराज को कहलाया
और स्वयं कार्पटिकका वेश पहन कर तीर्थयात्रा की; और वहींपर परलोक साधन किया।
३४) इसके बाद मालवा के राजाओंके साथ गूजरात के राजाओंका दृढमूल ऐसा विरोधका बंधन
बंध गया।