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प्रबन्धचिन्तामणि (आचार्य मेरुतुङ्ग - राजा भोज, विक्रमादित्य, सिद्धराज जयसिंह एवं मालवा इतिहास सटीक)

प्रबन्धचिन्तामणि (आचार्य मेरुतुङ्ग - राजा भोज, विक्रमादित्य, सिद्धराज जयसिंह एवं मालवा इतिहास सटीक)

Prabandhachintamani of Acharya Merutunga

आचार्य मेरुतुङ्ग (अनुवादक: मुनि जिनविजय / हजारीप्रसाद द्विवेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished181 पृष्ठ

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पृष्ठ 117

९२ ] प्रबन्धचिन्तामणि [ तृतीय प्रकाश
[ ११५ ] धारा-भंगके प्रसंगको देख कर, जिसके समीप आनेकी ही आशंकासे, प्रावृर्णकके बहाने
जिसको महोदय राजने दण्ड दिया।
[ ११६ ] जिस शत्रुने, अमृतकी भाँति, इसकी पृथिवीके लेनेकी इच्छा की, उसीको तलवारसे उल्लसित
इसके बाहुने राहु बना दिया (अर्थात् राहुके समान उसे सिरकटा बना दिया)। -
[ ११७ ] लोगोंने तो इसको कुमार (कार्तिकेय) की ही तरह शक्तिमान् अपना स्वामी माना था,
लेकिन यह तो ताम्रचूडध्वज * था और वह केकिध्वज * था (यही इनमें अंतर था)।
[ ११८ ] ऐसा कोई राजा नहीं था, जिसको विश्वके इस एकमात्र वीरने जीता न हो; और ऐसी कोई
दिशा न थी जो इसके यशसे शोभित न हुई हो।
[ ११९ ] गणेशकी तरह जिस अग्रपुष्करे और वृषस्थितिको, मोदककी तरह, गौड राजा † आभ्यैसार'
और करस्थं हो गया। ;
[ १२० ] श्मशानमें बर्बर नामक राक्षसेन्द्रको बाँध करके राजाओंकी श्रेणीमें जो राजचंद्र
१. सिद्धराज हो गया।
[ १२१ ] जिसने, लड़ाईसे उठी हुई धूलसे पहले जिस आकाशको मलिन कर दिया था, उसने पीछेसे
उसी आकाशको अपनी कीर्तिलहरीसे धो कर उज्ज्वल कर दिया।
[ १२२ ] उस पृथ्वी मंडलके सूर्यके लोकान्तर होने पर चन्द्रसमान श्रीमान् राजा कुमारपालने
प्रजाका रक्षण किया।

  • [ताम्रचूडध्वज अर्थात् जिसका ध्वज कुक्कुटका चिह्न था] इस लिए यह ताम्रचूडध्वज कहलाता था। कुमार (कार्तिकेय)
    के ध्वजमें केकी अर्थात् मयूरका चिह्न था। मयूरकी अपेक्षा कुक्कुट अधिक बलवान् होता है, इस लिये कुमारसे भी अधिक
    सिद्धराजका शक्तिमान् होना इस पद्यमें ध्वनित किया गया है।
    १. गणेशके पक्षमें-आगे है हाथीकी सूंड जिसके; राजाके पक्षमें आगे है बाण जिसके। २ गणेशके पक्षमें-मूषकपर
    है स्थिति जिसकी; राजाके पक्षमें धर्मपर है स्थिति जिसकी। ३ मोदकके अर्थमें आभ्य=घृतसारवाला, राजाके अर्थमें = युद्धसार
    शाला। ४ मोदकके अर्थमें कर=हाथमें रहा हुआ; राजाके अर्थमें कर=दण्ड देनेवाला।
    † गौड=बंग देशका राजा सिद्धराजको कर देने वाला बना यह अर्थ इस पद्यमें ध्वनित किया गया है।