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सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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पृष्ठ 624

छब्बीसवाँ अध्याय : गोचरफल ६२३
गोचर में सूर्य कर्क राशि में है, तो कर्क से नवम गिनना ? दोनों
परिपाटी प्रचलित हैं। नारद का मत है कि वृषभ से ही नवम गिनना।
इस पुस्तक में यही परिपाटी मानी गई है। वृषभ से नवम मकर
हुआ। तो जिस समय सूर्य गोचर से कर्क में है उस समय शनि के
अलावा कोई ग्रह मकर में हो तो सूर्य का वेध होने के कारण तृतीय
सूर्य का शुभ फल नहीं होगा।
बुध सूर्य से २८ अंश से अधिक आगे पीछे नहीं रहता। शुक्र
सूर्य से ४८ अंश से अधिक आगे-पीछे नहीं जा सकता। इस कारण
जब कर्क में सूर्य होगा तो बुध या शुक्र मकर में हो ही नहीं सकते।
परन्तु बताना यह था कि शनि के अलावा अन्य ग्रह सूर्य का वेध
करते हैं इसलिये अन्य सब ग्रह लिख दिये गये हैं।
अब सूर्य के गोचर स्थान तथा वेध स्थान नीचे दिये जाते हैं।
शुभ गोचर स्थान ३, ६, १०, ११
वेध स्थान ९, १२, ४, ५
गोचर में एकादश सूर्य शुभ होता है। जन्म कुंडली में वृषभ में
चन्द्रमा है। वृषभ से एकादश मीन राशि होती है। मीन में जब सूर्य
गोचर से आवेगा (प्रति वर्ष १३ मार्च से १३ अप्रैल तक सूर्य मीन में
होता है) तब शुभ होगा किन्तु यदि वृषभ से पंचम (क्योंकि ऊपर
११ के नीचे ५ लिखा है-इसका अर्थ हुआ कि जब चन्द्र राशि से
सूर्य एकादश हो तो वेध स्थान चन्द्र राशि से पंचम होगा) कन्या में
शनि के अलावा कोई ग्रह हो तो वेध होने से तृतीय सूर्य का जो
शुभ फल गोचर का है वह नहीं होगा।
द्यूनजन्मरिपुलाभखत्रिगः
चन्द्रमाः शुभफलप्रदः सदा ।