फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपच्चीसवां अध्याय : गुलिकादि उपग्रह ६०१
षड्भिर्भैः परिवेष इन्द्रधनुरित्यस्मिंश्च्युते मण्डला-
दत्यष्ट्यंशयुतेऽत्र केतुरथ तत्रैकर्क्षयुक्तो रविः ॥५॥
(१) मान्दि, (२) यमकंटक, (३) अर्द्धप्रहार, (४) काल, (५)
धूम, (६) व्यतीपात, (७) परिधि, (८) इन्द्रधनु और (९) उपकेतु
—इन नवों उप-ग्रहों को मैं नमस्कार करता हूँ ।
यदि दिनमान ३० घड़ी हो तो रविवार को सूर्योदय के २६ घड़ी
बाद मान्दि होगा; सोमवार को २२ घड़ी बाद; मंगलवार को १८ घड़ी
बाद, बुध को १४ घड़ी बाद, बृहस्पतिवार को सूर्योदय से १० घड़ी
बाद; शुक्रवार को सूर्योदय से ६ घड़ी बाद और शनिवार को सूर्योदय
के २ घड़ी बाद मान्दि होता है। यदि दिनमान पूरा तीस घड़ी न
हो—कुछ कम या अधिक हो तो उसी अनुपात से २६, २२, १८, १४,
१०, ६, २—यह जो घड़ियाँ बताई गई हैं इनमें अन्तर कर देना
चाहिये। इस प्रकार दिन के समय मान्दि की स्थिति निकाली जा
सकती है।
रात्रि के समय मान्दि की स्थिति रात्रि-उदय काल (अर्थात् जब
दिनमान समाप्त होता है) उसके बाद किस वार को कितने घड़ी पर
होगा, यह नीचे बताया जाता है।
रविवार को सूर्यास्त के बाद १० घड़ी पर
सोमवार को ,, ,, ६
मंगलवार को ,, ,, २
बुधवार को ,, ,, २६
बृहस्पतिवार को ,, ,, २२
शुक्रवार को ,, ,, १८
शनिवार को ,, ,. १४
रात्रिमान यदि पूरा तीस घड़ी न हो कुछ कम या अधिक हो तो
अनुपात से अन्तर करना चाहिये ।