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सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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पृष्ठ 476

॥ -> ॥५७॥
(ii) बुध की महादशा में केतु की अन्तर्दशा का फल :
दुःख, शोक और कलह से मन व्याकुल रहे, जातक का बदन
काँपे; शत्रुओं से समागम हो, खेत और सवारी नष्ट हो ॥५८॥
(iii) बुध की महादशा में शुक्र की अन्तर्दशा का फल :
देवता, ब्राह्मण और गुरुओं का पूजन हो । दान और धर्म
में जातक लगा रहे । वस्त्र और भूषणों की प्राप्ति हो । मित्रों से
समागम हो ॥५९॥

Everything is checked and aligned accurately with the line markers.इक्कीसवाँ अध्याय : प्रत्यन्तर्दशाफल ४७५
मानहानिरथवाश्रयच्युतिः
स्वक्षयोऽग्निविषतोयजं भयम् ।
मस्तकाक्षिजठरप्रपीडनं
शीतरश्मिजदशां गतेऽसुरे ॥६३॥
व्याधिशत्रु भयविच्युतिर्भवे-
द्ृ हासिद्धिरवनीशसत्कृतिः ।
धर्मसिद्धितपसां समुद्गमो
देवमन्त्रिणि विदो दशां गते ॥६