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सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 427, कुल 684 में से

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४२६ फलदीपिका
में बैठे हों तो गणित शास्त्र में प्रवीण होता है। मूल में गणक शब्द
आया है। इसका यह भी अर्थ होता है कि ज्योतिषी हो।
८. यदि दूसरे घर में शुक्र हो तो काव्य प्रेमी या कवि
होता है।
९. यदि राहु पंचम में हो तो गूढ़ भाव जानने वाला हो अर्थात्
ऐसी विद्याओं में पारंगत हो जो बहुत दुरूह हों यानी इतनी कठिन
हो कि साधारणतया उनका मार्मिक अर्थ समझ में न आता हो।
१०. चौथे घर में राहु हो तो माता की दीर्घ आयु होती है।
११. दूसरे घर में बृहस्पति हो तो जातक वेद और वेदान्त का
अच्छा ज्ञाता हो। यदि कक या धनु या मीन का वृहस्पति हो तो
अवश्य ही ऐसा होता है और ऐसे जातक का उसकी विद्वत्ता के
कारण सभा, सोसाइटियों (समाज) में अच्छा आदर होता है।
१२. यदि दूसरे घर का स्वामी और वृहस्पति केन्द्र या कोण में
हो तो जातक विविध विद्याओं में विद्वान् हो ।
१३. दूसरे घर में मंगल हो तो जातक तर्क शास्त्र का
पंडित हो।
१४. अगर वहाँ (ऊपर के योग में) मंगल के साथ साथ
चन्द्रमा हो तो जातक सूत्रों को जानने वाला हो ।
१५. यदि दूसरे घर में शनि हो तो जातक मूढ़ और दुष्ट
होता है।
वाणी
१. यदि शनि दूसरे घर में हो तो जातक की वाणी स्पष्ट
नहीं होती, उसकी भाषा भी शिष्ट नहीं होती ।
२. दूसरे घर में बृहस्पति हो या केतु हो तो चतुर और निपुण
हो ।