फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबीसवाँ अध्याय : अन्तर्दशाफल ४२५
निर्धन योग विचार
१. यदि प्रथम, चतुर्थ तथा नवम घर के मालिक ८वें घर में
बैठे हों तो जन्म से ही दरिद्र होता है ।
२. दूसरे घर का स्वामी १२वें हो, १२वें घर का स्वामी
दूसरे हो ।
३. दूसरे का स्वामी बारहवें हो और बारहवें का स्वामी
लग्न में और उनको मारक ग्रह देखता हो
४. पांचवें घर का मालिक छठे हो, नवें का मालिक अष्टम
में हो और इन दोनों को मारक ग्रह देखते हों ।
ऊपर लिखे चारों योगों में जातक निर्धन होता है ।
विद्या विचार
१. चतुर्थ में शुक्र हो तो गान विद्या विशारद होता है ।
२. यदि चौथे घर में बुध हो तो ज्योतिष शास्त्र विशारद हो ।
३. यदि पांचवें घर में सूर्य हो या पाँचवें घर में राहु बुध हों
तो जातक ज्योतिष में निपुण होता है या विष की चिकित्सा करने
वाला चतुर वैद्य होता है।
४. (क) यदि दूसरे घर में सूर्य और बुध हो तो ज्योतिष विद्या
विशारद हो, (ख) यदि इन दोनों ग्रहों को शनि देखता हो तो गणित
शास्त्र में प्रवीण होता है ।
५. यदि दूसरे गृह में सूर्य और मंगल हो तो तर्क शास्त्र
विशारद हो ।
६. यदि पाँचवें घर में सूर्य, बुध, शनि हों तो वेदान्त शास्त्र
का अच्छा ज्ञाता हो ।
७. यदि सूर्य और बुध एक साथ किसी केन्द्र कोण या लाभ