फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउन्नीसवाँ अध्याय : दशाफल ३८१
धनु लग्न विचार
अब धनु लग्न जातक के कुछ योग दिये जाते हैं :-
१. धनु लग्न हो, पाँचवें घर में शनि हो तो शनि की दशा योग
देने वाली होती है अर्थात् अच्छा फल करती है ।
२. धनु लग्न हो, तुला का शनि लाभ स्थान में हो तो शनि
योग देने वाला होता है, अन्य किसी भी लग्न की कुण्डली में
शनि ११वें योग कारक नहीं होता । हम इस विचार से सहमत
नहीं हैं क्योंकि सारावली अध्याय ६ श्लोक ४ के अनुसार कुछ का
मत है कि एकादश स्थान में बैठे हुये सभी ग्रह शुभ कारक होते हैं
और धन लाभ कराते हैं। कहा भी है 'लाभे सर्वे प्रशस्ताः' अर्थात् लाभ
स्थान में चाहे शुभ ग्रह हो चाहे क्रूर ग्रह हों सभी प्रशस्त हैं अर्थात्
उनको अच्छे बैठे हुये समझना चाहिये । ऐसी स्थिति में भावार्थ
रत्नाकरकार का यह कहना कि केवल तुला राशि का शनि एका-
दश में योग फल देने वाला होता है अन्य राशियों का नहीं थोड़ा
सा प्रचलित विचार के विरुद्ध है ।
३. धनु लग्न हो और सूर्य और शुक्र नवम सिंह के, शनि
कुम्भ राशि का तृतीय हो तो शनि की दशा में धनागम हो और
भाग्य योग हो ।
४. धनु लग्न में हो, मंगल और सूर्य कुम्भ के तृतीय में हो,
राहु नवम स्थान हो तो राहु की दशा में तीर्थ स्नान हो ।
मकर लग्न विचार
अब मकर लग्न वाली कुण्डलियों का विचार देते हैं :-
१. यदि मकर लग्न हो तो बुध योगप्रद होता है, अर्थात् बुध
की दशा, अन्तर्दशा अच्छा फल करेगी ।