फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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की मृत्यु होगी । मृत्यु के समय लग्न कौन सा होगा ? जातक
की जन्मकुण्डली में लग्न, चन्द्रमा और मान्दि स्पष्टों को जोड़िये ।
जो योग आवे उस राशि का स्वामी कहाँ बैठा है यह देखिये । जिस
राशि में बैठा है वही राशि मृत्यु के समय लग्न होगी । ॥१२॥
गुलिकं रविसूनुं च गुणित्वा नवसंख्यया ।
उभयोरैक्यराश्यंशगृहगे रविजे मृतिः ॥१३॥
मान्दि स्पष्ट को नौ (९) से गुणा कीजिये तथा शनि स्पष्ट को
९ से गुणा कीजिये । दोनों का योग कीजिये । यह योग जिस राशि
और जिस नवांश पर आवे उस पर जब गोचरवश शनि आता है तो
जातक की मृत्यु हो सकती है ।
स्फुटे विलग्ननाथस्य 'विशोध्य यमकण्टकम् ।
तद्राशिनवभागस्थे जीवे मृत्युर्न संशयः ॥१४॥
लग्नेश-स्पष्ट में से यमकंटक घटाइये और यह देखिये कि कौन
सी राशि और कौनसा नवांश आता है । जब बृहस्पति गोचरवश इस
नवांश पर आता है तो जातक की निस्सन्देह मृत्यु होगी । ॥१४॥
षष्ठावसानरन्ध्रेशस्फुटैक्यभवनं गते ।
तत्त्रिकोणोपगे वाऽपि मन्दे मृत्युभयं नृणाम् ॥१५॥
षष्ठेश, अष्टमेश, और द्वादशेश इन तीनों ग्रहों की राशि, अंश
कला जोड़िये । अर्थात् इन तीनों के ग्रह स्पष्ट जोड़िये । जोड़ने से जो
राशि आवे उस राशि में या उससे नवम पंचम जब शनि आवे तो
जातक की मृत्यु हो सकती है । ॥१५॥