फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसत्रहवाँ अध्याय : निर्याणप्रकरण ३२५
और नवांश में हों उन राशि नवांश पर या उनसे नवम, पंचम जब
गोचरवश बृहस्पति आता है तब जातक की मृत्यु होती है ।
राहु की राशि, अंश, कला में से मंगल की राशि, अंश, कला
घटाइये, जो शेष बचे उसको कहिये "ग" । "ग" जिस राशि और नवांश
में है उस स्थान पर या उससे नवम-पंचम जब गोचरवश बृहस्पति
आता है तब जातक के भाई की मृत्यु हो सकती है । ।६।।
भानोः कण्टकवर्जितस्य भवनांशे वा त्रिकोणे गुरौ
तातो नश्यति कण्टकोनगुलिकक्षांशत्रिकोणे शनौ ।
अर्कोनेन्दुगृहांशकोणगगुरौ चन्द्रोनमन्दात्मज-
क्षेत्रेऽशेऽप्यथवा त्रिकोणगृहगे मन्दे जनन्या मृति ॥७॥,
सूर्य की राशि, अंश, कला से यमकंटक की राशि, अंश कला घटाइये ।
जो शेष बचे उसे कहिये "क" । "क" जिस राशि और नवांश में है
उस पर या उससे नवमपंचम गोचरवश बृहस्पति आता है तब जातक
के पिता की मृत्यु हो सकती है ।
यमकंटक की राशि, अंश, कला में से मान्दि (गुलिक) की राशि,
अंश, कला घटाइये, जो शेष बचे उसे कहिये "ख" । "ख" जिस राशि
और नवांश में है उस पर या उससे नवमपंचम पर जब गोचरवश
शनि आवे तब जातक के पिता की मृत्यु हो सकती है ।
सूर्य-स्पष्ट में से चन्द्र स्पष्ट घटाइये, जो शेष बचे उसे कहिये
'ग' । "ग" जिस राशि और नवांश में हो उस पर या उससे नवम
पंचम जब गोचरवश बृहस्पति आवे तब जातक की माता की मृत्यु
हो सकती है ।
चन्द्र-स्पष्ट में से मान्दि-स्पष्ट घटाइये, जो शेष बचे उसको कहिये
"घ" । "घ" जिस राशि और नवांश में है उस पर या उससे नवम