फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंछठा अध्याय : योग १३३
(१) यदि व्ययेश* लग्न में हो और लग्नेश व्यय में (२) यदि
व्ययेश द्वितीय में हों और द्वितीयेश व्यय में (३) यदि व्ययेश तृतीय
में हो और तृतीयेश व्यय में (४) यदि व्ययेश सुख में हो और सुखेश
व्यय में (५) यदि व्ययेश पंचम में हो और पंचमेश व्यय में (६) यदि
व्ययेश षष्ठ में हो और षष्ठेश व्यय में (७) यदि व्ययेश सप्तम में
हो और सप्तमेश व्यय में(८)यदि व्ययेश अष्टम में हो और अष्टमेश
व्यय में (९) यदि व्ययेश भाग्य में हो और भाग्येश व्यय में (१०) यदि
व्ययेश राज्य में हो और राज्येश व्यय में (११) यदि व्ययेश लाभ में
हो और लाभेश व्यय में ।
(१२) यदि अष्टमेश लग्न में हो और लग्नेश अष्टम में (१३) यदि
अष्टमेश धन में हो और धनेश अष्टम में (१४) यदि अष्टमेश तृतीय
में हो और तृतीयेश अष्टम में (१५) यदि अष्टमेश सुख में हो और
सुखेश अष्टम में (१६) यदि अष्टमेश पंचम में हो और पंचमेश
अष्टम में (१७) यदि अष्टमेश छठे में हो और षष्ठेश अष्टम में (१८)
यदि अष्टमेश सप्तम में हो और सप्तमेश अष्टम में (१९) यदि
अष्टमेश भाग्य में हो और भाग्येश अष्टम में (२०) यदि अष्टमेश
राज्य में और राज्येश अष्टम में (२१) यदि अष्टमेश लाभ में हो और
लाभेश अष्टम में ।
(२२) यदि षष्ठेश लग्न में हो और लग्नेश षष्ठ में (२३) यदि
षष्ठेश धन में और धनेश षष्ठ में (२४) यदि षष्ठेश तृतीय में और
तृतीयेश षष्ठ में (२५)यदि षष्ठेश सुख में और सुखेश षष्ठ में(२६)
यदि षष्ठेश पंचम में और पंचमेश षष्ठ में (२७) यदि षष्ठेश सप्तम
में और सप्तमेश षष्ठ में (२८) यदि षष्ठश भाग्य में और भाग्येश
- बारहवें घर को व्ययस्थान और इस स्थान के स्वामी को
व्ययेश कहते हैं ।