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सर्वकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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२१० फलदीपिका
हंसे सद्गूरभिष्टुतः क्षितिपतिः शङ्खाब्जमत्स्याङ्कुशै-
श्चिह्नैः पादकराङ्कितः शुभवपुर्मृष्टान्नभुग्धार्मिकः ।
पुष्टाङ्गो धृतिमान्धनी सुतवधूभाग्यान्वितो वर्धनो
मालव्ये सुखभुक्सुवाहनयशा विद्वान्प्रसन्नेन्द्रियः ॥ ३ ॥
शस्तः सर्वजनैः सुभृत्यबलवान् ग्रामाधिपो वा नृपो
दुर्वृत्तः शशयोगजोऽन्यवनितावित्तान्वितः सौख्यवान् ।
लग्नेन्द्वोरपि योगपञ्चकमिदं साम्राज्यसिद्धिप्रदं
तेष्वेकादिषु भाग्यवान् नृपसमो राजा नृपेन्द्रोऽधिकः ॥४॥
जो व्यक्ति रुचक योग में पैदा होता है उसका दीर्घ चेहरा
हो, बहुत साहस से धन प्राप्त करे । शूर और बली हो, शत्रुओं को
मारने* वाला और अभिमानी हो । ऐसा व्यक्ति अभिमानी प्रकृति का
होता है और सेनापति हो (सेनापति से तात्पर्य समझना चाहिये
उच्च पदाधिकारी) अपने गुणों