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सर्वकोश
परिभाषेन्दुशेखर (नागेश भट्ट - व्याकरण परिभाषा सिद्धान्त एवं भैरवी टीका सटीक)

परिभाषेन्दुशेखर (नागेश भट्ट - व्याकरण परिभाषा सिद्धान्त एवं भैरवी टीका सटीक)

Paribhashendushekhara of Nagesha Bhatta with Commentary

महामहोपाध्याय नागेश भट्ट (सम्पादक: पं. विश्वनाथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished373 पृष्ठ

पृष्ठ 193, कुल 373 में से

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पृष्ठ 193

'? No, look at the conjunct:
ह् + र = ह्र. Below it is nothing, so ह्र. Then द: जिह्रदि'ति.
Wait! What root has aṅga 'जिह्रद्'?
Wait! 'ह्राद्' (ह्रादेः) -> णिच् -> ह्रादि -> चङ् -> जिह्राद् -> ह्रस्व -> जिह्रद्!
'मा भवान् अजीह्रदत्' / 'मा भवानुजिह्रदत्' (with un-? No, 'मा भवानजीह्रदत्' or 'मा भवान् अजिह्रदत्')!
Wait, look at the text in L24:
"'मा भवानजीह्रदि'ति"?!
Wait! Look at the first letters of the quote:
' म ा भ व ा न [ु or ज?] ...
Wait! Look closely at the letter after 'भवान्':
It is 'अ' or 'उ'?
It's 'अ'!
Wait, look: ' म ा भ व ा न जी ह्र दि ' ति !
Wait, is it "अजीह्रदत्" or "अजीह्रदिति"?
Look:
' म ा भ व ा न (भवान्)
then:
अ (a)
जी (jee)
ह्र (hra)
दि (di)
' त ि (ti)
Wait, why "दि'ति"?
Wait, in