परिभाषेन्दुशेखर (नागेश भट्ट - व्याकरण परिभाषा सिद्धान्त एवं भैरवी टीका सटीक)

परिभाषेन्दुशेखर (नागेश भट्ट - व्याकरण परिभाषा सिद्धान्त एवं भैरवी टीका सटीक)
Paribhashendushekhara of Nagesha Bhatta with Commentary
महामहोपाध्याय नागेश भट्ट (सम्पादक: पं. विश्वनाथ मिश्र) द्वारा
DevanagariHindipublished373 पृष्ठ
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Could it be 'उगिद्ग्रहणभिन्नत्वे-'?
Let's see if there are squished letters:
उ - गि - द् - ग्र - ह - ण - भि - न्न - त्वे ?
No, there is no 'ह' or 'ण' there.
Wait, let's look at the letter after 'द्':
It is: द्र or द्व?
Wait, look at line 6: "उगिद्वर्णग्रहणवर्जम्"
Could it be "उगिद्वर्णत्वे-"? No, there is 'न्न' (nna).
Wait, look at 'भिन्न' in line 9:
L9: "उगिद्- ग्रहणभिन्नत्वे सति वर्णग्रहणभिन्नत्वे सति..."
In line 9-10, the definition has THREE conditions:
- उगिद्ग्रहणभिन्नत्वे सति (ugidgrahaṇabhinnatve sati)
- वर्णग्रहणभिन्नत्वे सति (varṇagrahaṇabhinnatve sati)
- प्रत्ययग्रहणभिन्नत्वे सति (pratyayagrahaṇabhinnatve sati)
In line 12:
"उगिद्ग्रहणभिन्नत्वेत्यस्य न फलम्"
Here, in line 33, it says:
"...'उगितश्च' इत्यस्य तदन्तविध्यप्राप्तौ तत्प्राप्त्यर्थं उगिद्ग्रहणभिन्नत्वेत्य