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परिभाषेन्दुशेखर (नागेश भट्ट - व्याकरण परिभाषा सिद्धान्त एवं भैरवी टीका सटीक)

परिभाषेन्दुशेखर (नागेश भट्ट - व्याकरण परिभाषा सिद्धान्त एवं भैरवी टीका सटीक)

Paribhashendushekhara of Nagesha Bhatta with Commentary

महामहोपाध्याय नागेश भट्ट (सम्पादक: पं. विश्वनाथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished373 पृष्ठ

पृष्ठ 158, कुल 373 में से

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पृष्ठ 158

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Let's look at:
व्या (vya)
पा (pa)
रै (rai - two matras!)
स्त (sta - half sa + ta!)
त्रितया (tri-ta-yaa)?
Wait! "व्यापारैस्तत्त्रितयारब्ध..."?
Let's look at the ligature:
र has two slants above: रै!
Then half-स + त = स्त!
Then त् + त्रि = त्त्रि!
Then त - या - र - ब्ध = तया-रब्ध!
YES!
फलव्यापारैस्तत्त्रितयारब्धसमुदायरूपस्येत्यर्थः!
Let's verify:
तत्तच्छब्द- (word 1)
फल (word 2)
व्यापारैः (word 3) -> "तत्तच्छब्द-फल-व्यापारैः तत्-त्रितय-आरब्ध-समुदाय-रूपस्य इत्यर्थः"!
"By those three—the respective sound, the fruit, and the operation—the community formed by those three!"
WOW. That is brilliant!
Let's check the letters:
फ - ल - व्या - पा - रै - स्त - त्त्रि - त - या - र - ब्ध - स - मु - दा - य - रू - प - स्ये - त्य - र्थः
Wait, does it have 'स्तत्त्रितया' or 'स्तन्त्रित