परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary
भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा
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स्वाधिष्ठान में, छः मूलाधार में न्यास करना चाहिये। उदाहरण रूप में इसे इस
तरह विभाजित करना चाहिये— .
१. ब्रह्मरन्ध्र—६ वर्ण ऐं क्लीं सौः 'ऐं ह्रीं श्रीं ऐं क्लीं सौः' नमः ब्रह्मरन्ध्रे।
इसमें छः वर्ण न्यस्त हैं। नमः का योग भी है।
२. ललाट—३ वर्णयोग ऐं क्लीं सौः 'ओम् नमो नमः' ललाटे। इसमें तीन
वर्णों का योग है। योग सबमें है।
३. भ्रूमध्य—४ वर्णयोग ऐं क्लीं सौः 'भगवति' नमः भ्रूमध्ये इसमें चार वर्णों
का योग है। त्रितारी का प्रथम प्रयोग भी सबमें करना चाहिये।
४. दक्षनेत्र—६ वर्णयोग ऐं क्लीं सौः श्रीमातङ्गीश्वरि नमः, दक्षनेत्रे।
५. वामनेत्र—आठ वर्णयोग ऐं क्लीं सौः 'सर्वजनमनोहारि नमः' वामनेत्रे।
६. आस्य—सात वर्णयोग ऐं क्लीं सौः 'सर्वमुखरञ्जिनि' नमः आस्ये।
७. दक्षश्रोत्र—एक वर्णयोग ऐं क्लीं सौः 'क्लीं' दक्षश्रोत्रे।
८. वामश्रोत्र—एक वर्णयोग ऐं क्लीं सौः 'ह्रीं' नमः वामश्रोत्रे।
९. कण्ठ—एक वर्णयोग ऐं क्लीं सौः 'श्रीं' नमः, कण्ठे।
१०. दाहिना स्कन्ध—आठ वर्णों का योग ऐं क्लीं सौः 'सर्वराजवशङ्करि' नमः
दक्षस्कन्धे।
११. बायाँ स्कन्ध—दश वर्णयोग ऐं क्लीं सौः 'सर्वस्त्रीपुरुषवशङ्करि' नमः वाम-
स्कन्धे।
१२. हृदये—दश वर्णयोग ऐं क्लीं सौः 'सर्वदुष्टमृगवशङ्करि' नमः हृदये।
१३. दाहिना स्तन—आठ वर्णयोग ऐं क्लीं सौः 'सर्वसत्त्ववशङ्करि' नमः
दक्षस्तने।
१४. बायाँ स्तन—आठ वर्णयोग ऐं क्लीं सौः 'सर्वलोकवशङ्करि' नमः वामस्तने।
१५. नाभि—नव वर्णयोग ऐं क्लीं सौः 'अमुकं मे वशमानय' नमः नाभौ।
१६. स्वाधिष्ठान—दो वर्णयोग ऐं क्लीं सौः 'स्वाहा' नमः स्वाधिष्ठाने।
१७. मूलाधार—छः वर्णयोग ऐं क्लीं सौः 'सौः क्लीं ऐं श्रीं ह्रीं ऐं' नमः
मूलाधारे। चतुर्थ न्यास में मूलमन्त्र का इस प्रकार सत्रह विभाजन हो जाता