सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation

महर्षि पराशर द्वारा

स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished170 पृष्ठ

पृष्ठ 66, कुल 170 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 66

५४ पाराशरस्मृतिः [ षष्ठो-
शिल्पी ( चित्रकला करनेवाला ), काहक ( रसोइया ), शूद्र और
स्त्री को जो मारे वह दो प्राजापत्य व्रत करे तथा वृष के सहित ग्यारह
गौ दक्षिणा में देवे तब शुद्ध होता है ॥१६॥
वैश्यं वा क्षत्रियं वापि निर्दोषं योऽभिघातयेत् ।
१सोऽतिकृच्छ्रद्वयं कुर्याद् गोविंशद् दक्षिणां ददेत् ॥१७॥
जो निर्दोष क्षत्रिय अथवा वैश्य को मारे, वह दो अतिकृच्छ्र व्रत
करे और बीस गायों का दान करे तब शुद्ध होता है ॥१७॥
वैश्यं शूद्रं क्रियाऽऽसक्तं विकर्मस्थं द्विजोत्तमम् ।
हत्वा चान्द्रायणं २कुर्याद् दद्याद् गोत्रिंश दक्षिणाम् ॥१८॥
स्वक्रिया में निरत वैश्य अथवा शूद्र को किंवा स्वकर्म परिभ्रष्ट
ब्राह्मण को यदि कोई मारे, तो चान्द्रायण व्रत कर तीस गौ का दान
करने से वह शुद्ध होता है ॥१८॥
चाण्डालं हतवान् कश्चिद् ब्राह्मणो यदि कश्चन ॥
प्राजापत्यं चरेत् कृच्छ्रं गोद्वयं दक्षिणां ददेत् ॥१९॥
यदि किसी ब्राह्मण ने चाण्डाल का वध कर दिया हो तो वह
प्राजापत्य कृच्छ्र करे और दो गौ को दक्षिणा में देवे ॥१९॥
क्षत्रियेणाऽपि वैश्येन शूद्रेणैवेतरेण वा ।
चाण्डालस्य वधे प्राप्ते कृच्छ्रार्द्धेन विशुद्ध्यति ॥२०॥
यदि क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र अथवा किसी अन्य ने चाण्डाल का वध कर
दिया हो तो आधा कृच्छ्र व्रत से उसकी शुद्धि होती है ॥२०॥
३चौराः ४श्वपाकचाण्डाला विप्रेणाभिहता ५ यदि ।
अहोरात्रोषितः स्नात्वा पञ्चगव्येन शुद्ध्यति ॥२१॥
१. 'सोऽपि' इति । २. 'तस्य त्रिंशद् गाश्चैव दक्षिणा' इति क्वचित्पुस्तके ।
३. 'चोरः' इति । ४. 'पूर्वपाकश्चाण्डालो' इति । ५. 'विप्रेणाभिहतो' इति ।