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पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation

महर्षि पराशर द्वारा

स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished170 पृष्ठ

पृष्ठ 59, कुल 170 में से

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पृष्ठ 59

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ऽध्यायः ] भाषाटीकासहिता ४७

यदि किसी ऐसे गाँव में ब्राह्मण को कुत्ते ने काट लिया हो, जिसमें
एक भी ब्राह्मण न हो तो वह बेल की प्रदक्षिणा कर स्नान कर लेवे ।
इतने से ही वह शुद्ध हो जाता है ॥ ९ ॥
चाण्डालेन श्वपाकेन गोभिर्विप्रैर्हतो यदि ।
अहिताग्निर्मृतो विप्रो विषेणात्महतो यदि ॥१०॥
यदि कोई अग्निहोत्री, चाण्डाल ( ब्राह्मणी में शूद्र से उत्पन्न ),
श्वपाक ( क्षत्राणी में शूद्र से उत्पन्न ), गौ अथवा ब्राह्मण के मारने से
मर गया हो अथवा स्वयं विष खाकर आत्महत्या कर ले, तो ॥१०॥
दहेत्तं ब्राह्मणं विप्रो लोकाग्नौ मन्त्रवर्जितम् ।
स्पृष्ट्वा वोढ्वा च दग्ध्वा च सपिण्डेषु च सर्वथा ॥११॥
उस अग्निहोत्री ब्राह्मण को उसका कोई सपिण्डी ब्राह्मण बिना
मन्त्र पढ़े ही लौकिक अग्नि में जला देवे और उसके स्पर्श, श्मशान तक
वहन तथा दाह करने के पाप के निमित्त, ॥११॥
प्राजापत्यं चरेत् पश्चाद् विप्राणामनुशासनात् ।
दग्ध्वाऽस्थीनि पुनर्गृह्य क्षीरैः प्रक्षालयेत् द्विजः ॥१२॥
ब्राह्मणों की आज्ञा लेकर प्राजापत्य व्रत करे । फिर वह ब्राह्मण
उसकी हड्डियों का पुनः दाह कर उसे दूध से धोवे ॥१२॥
स्वेनाग्निना स्वमन्त्रेण पृथगेतत् पुनर्दहेत् ।
आहिताग्निर्द्विजः कश्चित् प्रवसन् कालचोदितः ॥१३॥
पुनः उसे अलग किसी स्थान पर अग्निहोत्र की अग्नि से मन्त्रपूर्वक
जलावे ( पश्चात् उसकी क्रिया करे ) । यदि कोई अग्निहोत्री ब्राह्मण
दुर्देव से परदेश में जाकर, ॥१३॥
देहनाशमनुप्राप्तस्तस्याऽग्निर्वर्तते गृहे ।
प्रेताऽग्निहोत्र-संस्कारः१ श्रूयतामृषिपुङ्गवाः ॥१४॥

[Footnote]
१. 'श्रोताग्निहोत्रसंस्कारः इति पा० ।