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पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation

महर्षि पराशर द्वारा

स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished170 पृष्ठ

पृष्ठ 36, कुल 170 में से

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पृष्ठ 36

२४ पाराशरस्मृतिः [ तृतीयो-
गृहस्थ ब्राह्मण की बात कही। क्षत्रिय इसी प्रकार खेती कर ब्राह्मण
तथा देवताओं का पूजन करे ॥१८॥
वैश्यः शूद्रस्तथा कुर्यात् कृषि-वाणिज्य-शिल्पकान् ।
वि कर्म कुर्वते शूद्रा द्विजसेवा-विवर्जिताः ॥१९॥
वैश्य तथा शूद्र भी खेती, व्यापार तथा कारीगरी का काम करे।
परन्तु यदि शूद्र ब्राह्मण की सेवा को छोड़कर कोई अन्य कार्य करे, तो
वह अपने कर्म से विरुद्ध कर्म करनेवाला होता है ॥१९॥
भवन्त्यल्पायुषस्ते वै निरयं यान्त्यसंशयम् ।
चतुर्णामपि वर्णानामेष धर्मः सनातनः ॥२०॥
इति पाराशरीये धर्मशास्त्रे गृहस्थधर्माचारो नाम
द्वितीयोऽध्यायः ॥ २ ॥
वे अल्पायु तथा मरने पर नरक के भागी होते हैं। यह धर्म चारों
वर्णों का सदैव से चला आया है, इसलिए यही सनातन धर्म
है ॥ २० ॥
इस प्रकार पण्डित शिवदत्तमिश्रशास्त्रिकृत 'शिवदत्ती' भाषाटीका में पाराशर-
प्रोक्त धर्मशास्त्र में गृहस्थधर्माचार नामक द्वितीय अध्याय समाप्त ॥२॥
•
३. तृतीयोऽध्यायः
अतः शुद्धिं² प्रवक्ष्यामि जनने मरणे तथा ।
दिनत्रयेण शुद्ध्यन्ति ब्राह्मणाः³ प्रेतसूतके ॥ १ ॥
गृहस्थ का धर्माचार कहकर, ग्रन्थाकार कहते हैं कि अब जन्म तथा
मरण में जितने दिनों के अनन्तर गृहस्थ की शुद्धि होती है, उसे मैं
कहूँगा। ब्राह्मण लोग मरणाशौच में तीन दिनों में शुद्ध होते हैं।
१. '-शुश्रूष-' इति क्वचित्पुस्तके । २. 'परं' इति पा० । ३. 'जन्म' इति ।