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पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation

महर्षि पराशर द्वारा

स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished170 पृष्ठ

पृष्ठ 32, कुल 170 में से

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पृष्ठ 32

CC-0. In Public Domain. Digitization by eGangotri
२० पराशरस्मृतिः [ द्वितीयो-
अध्ययन, अध्यापन, यजन, याजन, दान तथा प्रतिग्रह इन छः
कर्मों में लगा हुआ ब्राह्मण कृषि-कर्म ( खेती ) भी करावे ॥२॥
क्षुधितं तृषितं श्रान्तं बलीवर्दं न योजयेत् ।
हीनाङ्गं व्याधितं क्लीवं वृषं विप्रो न वाहयेत् ॥ ३ ॥
भूखे, प्यासे, थके हुए, अंगहीन, रोगी तथा बधिया ( क्लीब ) बैल
को ब्राह्मण हल में न जोते ॥३॥
स्थिराङ्गं नीरुजं दृप्तं सुनर्दं षण्ढवर्जितम् ।
वाहयेद् दिवसस्याऽर्द्धं पश्चात् स्नानं समाचरेत् ॥ ४ ॥
जिस बैल का अंग पुष्ट हो तथा जो नीरोग हो, ऐसे अहंकार से
भरे हुए तथा सुन्दर हँडकनेवाले बैल को, जो बधिया न हो, ब्राह्मण
आधा दिन जोतकर अनन्तर स्नान करे ॥४॥
जप्यं देवार्चनं होमं स्वाध्यायं चैवमभ्यसेत् ।
एक-द्वि-त्रि-चतुर्विप्रान् भोजयेत् स्नातकान् द्विजाः ॥५॥
ब्राह्मण को प्रतिदिन जप, देव पूजन, होम तथा वेदों का स्वाध्याय
करना चाहिए । और एक, दो, तीन अथवा चार स्नातक ब्रह्मचारी को
प्रतिदिन भोजन भी कराना चाहिए ॥५॥
स्वयं कृष्टे तथा क्षेत्रे धान्यैश्च स्वयमर्जितैः ।
निर्वपेत् पञ्चयज्ञांश्च¹ क्रतुदीक्षां च कारयेत् ॥ ६ ॥
अपने खेत में अपनी कमाई के द्वारा उत्पन्न किये गये धान्य से
गृहस्थ ब्राह्मण प्रतिदिन पंचयज्ञ (बलिवैश्वदेवादि) तथा यज्ञ-दीक्षादि
भी करावे ॥६॥
१. '-यज्ञानि' इति पा० ।
Prof. Madhav Prasad Lamichhane Collection, Kathmandu, Nepal