पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation
महर्षि पराशर द्वारा
स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished170 पृष्ठ
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संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 130११४ पराशरस्मृतिः [ एकादशो-
११४ पराशरस्मृतिः [ एकादशो-
चारों वर्णों में से सभी लोगों की शुद्धि ब्रह्मकूर्च के पान और उपवास
करने से हो जाती है ॥२७॥
शूद्राणां नोपवासः स्याच्छूद्रो दानेन शुद्धयति ।
ब्रह्मकूर्चमहोरात्रं श्वपाकमपि शोधयेत् ॥२८॥
शूद्रों को उपवास करने का आदेश नहीं दिया गया है । शूद्र केवल
दान करने से ही शुद्ध हो जाता है । ब्रह्मकूर्च पान करके रात-दिन रह
जाने से चाण्डाल भी शुद्ध हो जाता है ॥२८॥
गोमूत्रं गोमयं क्षीरं दधि सर्पिः कुशोदकम् ।
निर्दिष्टं पञ्चगव्यं तु१ पवित्रं पापशोधनम् ॥२९॥
पंचगव्य बनाने के लिए गाय का गोबर, गोमूत्र, दूध, दही, घी
और कुश के जल का मिश्रण किया जाता है । इसका मिश्रण समस्त
पापों का नाशक और अत्यन्त पवित्र कहा गया है ॥२९॥
गोमूत्रं कृष्णवर्णायाः श्वेतायाश्चैव गोमयम् ।
पयश्च ताम्रवर्णाया रक्ताया गृह्यते दधि ॥३०॥
काली गाय का मूत्र, सफेद गाय का गोबर, ताम्रवर्णी गौ का दूध
और लाल रंग की गाय का दही, ॥३०॥
कपिलायाः घृतं ग्राह्य सर्वं कौपिलमेव२ वा ।
मूत्रमेकपलं दद्यादङ्गुष्ठार्द्धं तु गोमयम् ॥३१॥
कपिला गाय का घृत अथवा उपर्युक्त वर्णित सभी वस्तुएँ कपिला
गाय का ही हो । गोमूत्र ४ तोला, आधे अँगूठे के बराबर गोबर, ॥३१॥
क्षीरं सप्तपलं दद्याद् दधि त्रिपलमुच्यते ।
घृतमेकपलं दद्यात् पलमेकं कुशोदकम् ॥३२॥
दूध २८ तोले, दही १२ तोले, घी ४ तोले और कुशा का जल ४
तोले लेना चाहिए । ३२॥
१. 'च' इति । २. 'कपिल' इति ।