पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation
महर्षि पराशर द्वारा
स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)
पृष्ठ 122, कुल 170 में से
संदर्भ में पढ़ें११० पराशरस्मृतिः [ दशमो-
नहीं करना चाहिए । त्याग कर देने से वह स्त्री स्वयं तो भ्रष्ट हो ही
जाती है, साथ-ही-साथ ॥३४॥
भर्ता चैव चरेत् कृच्छ्रं कृच्छ्रार्द्धं चैव बान्धवाः ।
तेषां भुक्त्वा च पीत्वा च अहोरात्रेण शुद्ध्यति ॥३५॥
उसके पति को भी एक कृच्छ्र और सम्बन्धी को आधा कृच्छ्र व्रत
करना पड़ता है । यदि ऐसे व्यक्ति के घर भोजन ग्रहण किया जाय तो
रात-दिन उपवास करने से शुद्धि प्राप्त होती है ॥३५॥
ब्राह्मणी तु यदा गच्छेत् परपुंसा विवर्जिता ।
गत्वा पुंसां शतं याति त्यजेयुस्तां तु गोत्रिणः ॥३६॥
यदि ब्राह्मण की पत्नी घर छोड़कर कहीं अकेली गमन करे और
सौ पुरुषों के पास जाकर भी लौट आये तो सगोत्रियों द्वारा ऐसी स्त्री
का बहिष्कार किया जाना चाहिए ॥३६॥
पुंसो यदि गृहे गच्छेत्तदशुद्धं गृहं भवेत् ।
पति-मातृगृहं यच्च जारस्यैव तु तद्गृहम् ॥३७॥
यदि ऐसी स्त्री अपने पति के घर वापस आ जाय तो उसके पति
का घर अशुद्ध हो जाता है । पतिगृह या पितृगृह में जाने पर भी वह
घर उसके प्रेमी का ही माना जाता है ॥३७॥
उल्लिख्य तद्गृहं पश्चात् पञ्चगव्येन ¹शोधयेत् ।
त्यजेच्च मृण्मयं पात्रं वस्त्रं काष्ठं च शोधयेत् ॥३८॥
ऐसे घर की शुद्धि के लिए उसकी भूमि की मिट्टी को कुछ खुरच-
कर पञ्चगव्य द्वारा लेपन करे । घर में व्यवहृत होनेवाले मिट्टी के
पात्रों को हटा दे, वस्त्र तथा काष्ठ को जल से धोकर शुद्ध
कर ले ॥३८॥
सम्भाराञ्शोधयेत् सर्वान् गोवालैश्च फलोद्भवान् ।
ताम्राणि पञ्चगव्येन कांस्यानि दश भस्मभिः ॥३९॥
१. 'सेचयेत्' इति ।