पंचतन्त्रम् (सटीक - सम्पूर्ण पाँचों तन्त्र)
पण्डित विष्णु शर्मा द्वारा
स्रोत: पंचतन्त्रम् (सटीक - सम्पूर्ण पाँचों तन्त्र) · श्रीवेङ्कटेश्वर स्टीम प्रेस, बम्बई · 1910 (उद्गम)
पृष्ठ 535, कुल 536 में से
संदर्भ में पढ़ें( ९२० ) पञ्चतन्त्रम् ।
दोहा-सीतापति रघुनाथश्री, भरत लषण हनुमान ।
हिये शत्रुसूदन सुमर, सज्जनको सुखदान ॥ १ ॥
पञ्चतन्त्रभाषा तिलक, कीन्हों मति अनुसार ।
बारबार शिवपद सुमर, बुधजन प्राण अधार ॥ २
रामनवमि तिथिमेषरवि, कियो संक्रमण आज ।
प्रेम सहित पूजे सबन, अवधराज महाराज ॥ ३ ॥
सम्वत् युगशर अंकविधु, चैत्रशुक्ल रविवार ।
नवमीतिथिको ग्रंथ यह, कीन्हों पूर्ण विचार ॥ ४ ॥
वसत राम गंगा निकट, नगर मुरादाबाद ।
कियो तिलक अतिशोध कर, द्विज ज्वालाप्रसाद॥५॥
वेंकटेश्वर यंत्र पति, खेमराज गुणवान ।
तिनको कीन्हों भेंट यह, सकलसुमंगल खान ॥ ६ ॥
रामराम सियराम कहु, रामराम सियराम ।
राम राम के कहतही, सिद्ध होत सब काम ॥ ७ ॥
बहुरिशारदा शिवाश्री, जगदम्बा गुणगाय ।
करहुं प्रार्थना जोरकर, कीजे सदा सहाय ॥ ८ ॥
सन्तसमागम जगतमें, सकल सुमंगल मूल ।
करहिं जो तिनपर लषन युत, राम रहहिं अनुकूल ॥९॥
॥ शुभमस्तु ॥
पञ्चतन्त्रं भाषाटीकासमेतं समाप्तम् ।
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पुस्तक मिलनेका ठिकाना-
खेमराज श्रीकृष्णदास,
"श्रीवेङ्कटेश्वर" स्टीम् प्रेस-बंबई.