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सर्वकोश
पंचतन्त्रम् (सटीक - सम्पूर्ण पाँचों तन्त्र)

पंचतन्त्रम् (सटीक - सम्पूर्ण पाँचों तन्त्र)

पण्डित विष्णु शर्मा द्वारा

स्रोत: पंचतन्त्रम् (सटीक - सम्पूर्ण पाँचों तन्त्र) · श्रीवेङ्कटेश्वर स्टीम प्रेस, बम्बई · 1910 (उद्गम)

DevanagariHindipublished536 पृष्ठ

पृष्ठ 384, कुल 536 में से

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[Header] भाषाटीकासमेतम् । ( ३६९ )

इसके संग विवाह करो”। ऐसा कह अपनी कन्यासे बोले-“पुत्रि ! क्या यह
त्रिलोकीके प्रकाशक भगवान् सूर्य तुमको रुचते हैं?” । पुत्रिका बोली-“पित.!
यह अधिक प्रज्वलित है। मैं इनकी अभिलाषा नहीं करती । सो इनसे अधिक
उत्कृष्ट कोई बुलाओ” तब उसके यह वचन सुन मुनि सूर्यसे बोले-“भगवन् !
कोई तुमसे भी अधिक शक्तिमान् है ?” सूर्य बोले-“मुझसे भी अधिक मेघ
है जिससे ढक कर मैं अदृश्य होता हूं ” । तब मुनिने मेघदेवताको बुलाकर
कन्यासे कहा-“पुत्रिके ! इसके निमित्त तुझे दू ?” । वह बोली । “-यह
कृष्णवर्ण जडात्मा है । सो इससे अधिक किसी प्रधानके निमित्त मुझे दो” ।
-तब मुनिने मेघसे पूछा-“भो मेघ ! तुझसे भी अधिक कोई है ?”। मेघने कहा
मुझसे भी अधिक वायुहै वायुसे हत हुआ मैं सहस्रधा हो जाता हूं”। यह सुनकर
मुनिने वायुको बुलाया । बोले भी-“पुत्रिके ! क्या यह वायु विवाहके निमित्त
तुझे अच्छा लगता है ?” वह बोली-“तात ! यह अधिक चपल है । सो इससे
अधिक कोई और बुलाओ”। मुनिने कहा-“वायो ! क्या कोई तुमसे भी
अधिक है ?”। वायुने कहा-“मुझसे अधिक पर्वत है जिससे निश्चल होकर बल-
वान् भी मैं धारित होता हूं” । तब मुनि पर्वतको बुलाकर कन्यासे बोले-
“पुत्रिके ! तुमको इसके निमित्त दू ?” । वह बोली-“तात ! यह कठिनात्मा
और निश्चल है, सो और किसीके निमित्त मुझे दो” । मुनिने पर्वतसे पूछा,-
“भो पर्वतराज ! कोई तुमसे भी अधिक है ?”। पर्वतने कहा-“मुझसे अधिक
मूषे हैं जो मेरे शरीरको बलसे विदीर्ण करते हैं”। तब मुनिने मुषकराजको
बुलाय उसे दिखाया और बोले-“पुत्रिके ! क्या इसके निमित्त तुझे दू यह-
मूषिकराज तुझको अच्छा लगता है ?” वह भी उसको देख यह स्वजातीय है
ऐसा मानकर पुलकावलीसे अलंकृत शरीरवाली उससे बोली,-“तात ! मुझे
मूषिका करके इसके निमित्त दो । जिससे अपनी जातिके योग्य गृहधर्मका अनु-
ष्ठान करूं” । तब वह भी अपने तपोबलसे उसे मूषिका करके उस ( मूषक-
राज ) को देते भये । इससे मैं कहता हू-
सूर्य्यं भर्तारमुत्सृज्य पर्जन्यं मारुतं गिरिम् ।
स्वजातिं मूषिका प्राप्ता स्वजातिर्दुरतिक्रमा ॥ २२१ ॥”
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