पञ्चसायक (कविशेखर ज्योतिरीश्वर - कामकला एवं रति-शास्त्र संस्कृत मूल पाठ)
Panchasayaka of Kavishekhara Jyotirishvara with Commentary
कविशेखर ज्योतिरीश्वर (सम्पादक: पं. श्रीधर शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकिमु कामिनीनाम् ॥३४॥ -> wait, "हृदयं"
इति सामान्यकर्मसमुद्देशः ॥
निसर्गजायाः प्रीतेः स्वरूपम् ।
“नाभ्यासतो नच भवेद् विषयाभिमाना
जन्मान्तरीयसहजा पुरुषस्य नार्याः ।
प्रीतिः परस्परतया हृदयानुबद्धा (wait, look at L10 again: is it 'हृदयानुबद्धा' or 'हृदयावनबद्धा' or 'हृदयाचनबद्धा'?)
Wait, let's look closely at L10:
'हृ' 'द' 'या' 'घ'/'च' 'न'/'नु' 'ब' 'द्धा'
Wait, look at the syllable between 'या' and 'बद्धा':
It has TWO characters:
First character: looks like 'च' or 'घ' or 'व'?
Second character: looks like 'न' with 'ु'? No, it has no 'ु', it's just 'न', or is it 'नु'? Wait, look at 'नु' in 'किमु' (L5 has 'मु').
Wait! Could it be "हृदयावनबद्धा" or "हृदयाचनबद्धा" or "हृदयानुबद्धा"?
Wait, look at 'हृदया' + 'च' + 'न' + 'बद्धा