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सर्वकोश
पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

Panchadashi by Swami Vidyaranya

स्वामी विद्यारण्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished726 पृष्ठ

पृष्ठ 242, कुल 726 में से

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पृष्ठ 242

ओम्
तृप्तिदीपप्रकरणम्
आत्मानं चेद् विजानीयादयमस्मीति पूरुषः ।
किमिच्छन् कस्य कामाय शरीर मनुसंज्वरेत् ॥१॥
अस्याः श्रुतेरभिप्रायः सम्यगत्र विचार्यते ।
जीवन्मुक्तस्य या तृप्तिः सा तेन विशदायते ॥२॥
आत्मानं चेद्विजानीयात् वृ० ४-४-१२ इस श्रुति का अभि-
प्राय इस तृप्तिदीप नाम के प्रकरण में भले प्रकार विचारा
जायगा । उससे जीवन्मुक्त महाशयों को जो अलौकिक तृप्ति रहा
करती है वह स्पष्ट विदित हो जायगी ।
मायाभासेन जीवेशौ करोतीति श्रुतत्वतः ।
कल्पितावेव जीवेशौ ताभ्यां सर्वं प्रकल्पितम् ॥३॥
माया आभास के द्वारा जीव और ईश्वर का निर्माण किया
करती है, ऐसा श्रुतियों में कहा गया है [इसका विस्तारपूर्वक
प्रतिपादन तत्वविवेक नामक प्रकरण के १५-१६-१७ श्लोकों में है]
सो ये जीव और ईश्वर दोनों ही कल्पित हैं । इन दोनों ने शेष
सब संसार की कल्पना कर डाली है ।
ईक्षणादिप्रवेशान्ता सृष्टि रीशेन कल्पिता ।
जाग्रदादिविमोक्षान्तः संसारो जीवकल्पितः ॥४॥
ईक्षण से लेकर