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पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad

सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished116 पृष्ठ

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पृष्ठ 73

पलटू साहिबु की बानी भाग—१ ६७

खारी पड़ा समुन्द बड़े सो काम के नाहीं ।
जैसे बड़ी खजूर पथिक को मिलै न छाँहीं ॥
भक्त कहावैं बड़े भेष ना खाय को पावैं ।
पूजें नाहीं साध बड़े घर ही कहवावैं ॥
खान पियन को नाहिं बचन करकसे सुनावैं ।
पर्बत बड़े कठोर नजर दूरहि से आवैं ॥
पलटू संपति सूम की खरचै ना इक बुन्द ।
सब कोइ पीवै कूप जल खारी पड़ा समुन्द ॥
( १६८ )
बढ़ते बढ़ते बढ़ि गये जैसे बढ़ी खजूर ॥
जैसे बढ़ी खजूर पथिक छाया नहिं पावै ।
त्यों त्यो कै जो फरै ताहि कैसे कोउ खावै ॥
पात में काँटा रहै छुवत कै लोहू आवै ।
पेड़ सोऊ बेकाम कुवा को धरन बनावै ॥
सम्पति में बढ़ि जाय दया बिन भला भिखारी ।
जातिहु में बढ़ि जाय भक्ति बिन भला चमारो ॥
पलटू सोभा दो