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सर्वकोश
पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad

सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished116 पृष्ठ

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पृष्ठ 64

५८ कुंडलिया
पलटू खामिंद एक है निसचै प्रेम प्रधान ।
० उपजै बस्तु सुभाव तें अपनी अपनी खानि ॥
( १४५ )
भक्ति बीज जब बोवै निसि दिन करै बिबेक ॥
निसि दिन करै बिबेक लागि तब निकरन साखा ।
डार पात बहु फूल जतन से जिन ने राखा ॥
हरि चरचा से सींचि ज्ञान कै बाँधै बेड़ा ।
पहुँचै सोर पताल खात संतन कै खेड़ा१ ॥
सोभित बृच्छ बिसाल मीठ फल लटकन लागे ।
बिस्वास सोई रखवार बैठि कै पहरा जागै ॥
पलटू यहि बिधि जोगवै उपजै ज्ञान बिसेख ॥
भक्ति बीज जब बोवै निसि दिन करै बिबेक ॥
( १४६ )
पलटू सरबस दीजिये मित्र न कीजै कोय ॥
मित्र न कीजै कोय चित्त दै बैर बिसाहै२ ।
निस दिन होय बिनास ओर वह नाहिं निबाहै ॥
चिन्ता बाढ़ै रोग लगा छिन छिन तन छीजै ।
कम्मर३ गरुवा होय ज्यों ज्यों पानी से भीजै ॥
जोग जुगत की हानि जहाँ चित अंतै जावै ।
भक्ति आपनी जाय एक मन कहूँ लगावै ॥
० राम मिताई ना चलै और मित्र जो होय ।
० पलटू सरबस दीजिये मित्र न कीजै कोय ॥
( १४७ )
रवा४ टूटै रवा फाटै कहिये परदा खोल ॥
कहिये परदा खोल रवा ना बाकी कीजै५ ।
(१) गाँव । (२) मोल ले । (३) कम्मल । (४) चाहे । (५) जर्रा (रवा)
भर न उठाय रक्खो ।