पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)
Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad
सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपलटू साहिब की बानी भाग—१ ६
कौड़ी घर में नाहिं आपु मैं माँगौं भिच्छा ॥
राई परबत करैं करैं परबत को राई ।
अदना के सिर छत्र पैज की करैं बड़ाई ॥
लीला अगम अपार सकल घट अंतरजामी ।
खाँहिं खिलावहिं राम देहिं हम को बदनामी ॥
हम सों भया न होयगा साहिब करता मोर ।
देत लेत हैं आपुहीं पलट पलट सोर ॥
॥ संत और साध ॥
( २२ )
बड़ा होय तेहि पूजिये संतन किया बिचार ॥
संतन किया बिचार ज्ञान का दीपक लीन्हा ।
देवता तैंतिस कोट नजर में सब को चीन्हा ॥
सब का खंडन किया खोजि के तीनि निकारा ।
तीनों में दुइ सही मुक्ति का एकै द्वारा ॥
हरि को लिया निकारि बहुर तिन मंत्र बिचारा ।
हरि हैं गुन के बीच संत हैं गुन से न्यारा ॥
पलटू प्रथमै संत जन दूजे हैं करतार ।
बड़ा होय तेहि पूजिये संतन किया बिचार ॥
( २३ )
सीतल चन्दन चन्द्रमा, तैसे सीतल संत ॥
तैसे सीतल संत जगत की ताप बुझावैं ।
जो कोइ आवै जरत मधुर मुख बचन सुनावैं ॥
धीरज सील सुभाव छिमा ना जात बखानी ।
कोमल अति मृदु बैन बज्र को करते पानी ॥
रहन चलन मुसकान ज्ञान को सुगंध लगावैं ।
तीन ताप मिट जाय संत के दर्सन पावैं ॥
पलटू ज्वाला उदर की रहै न मिटै तुरंत ।
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