पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)
Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad
सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
पृष्ठ 104, कुल 116 में से
संदर्भ में पढ़ें६८ कुंडलिया
राजा औ उमराव हाथ सब बाँधे आवैं।
द्वारे से फिरि जायें नहीं फिर मुजरा पावैं॥
जंगल में मंगल करै पलटू बेपरवाय।
कौड़ी गाँठि न राखई हमा-नियामत खाय॥
( २४५ )
जब देखौ तब सादी नौबत आठौ पहर॥
नौबत आठौ पहर गैब की निसु दिन झरती।
पचरँग जोड़ा खुसी दुखेस को सादी चढ़ती॥
आफताब¹ भा सूर² रोसनी दिल में आई।
फिरै गैब का छत्र जिकर³ का मुस्क⁴ लगाई॥
अन्दर भूलै फील⁵ खाब में खतरा नाहीं।
सबर है पीढ़ी पलँग सेहरा नाम इलाही॥
पलटू जलवा नूर का ज्यों दरियाव में लहर।
जब देखौ तब सादी नौबत आठौ पहर॥
( २४६ )
रन का चढ़ना सहज है मुसकिल करना जोग॥
मुसकिल करना जोग चित्त को उलटि लगावै।
बिषय बासना तजै प्रान ब्रह्मंड चढ़ावै॥
साधै वायू प्रान कुण्डली करै उथपना⁶।
अष्ट कँवल दल उलटि कँवल दल द्वादस लखना॥
इँगला पिंगला सोधि बंक के नाल चढ़ावै।
चार कला को तोड़ि चक्र षट जाय बिधावै॥
पलटू जो संजम करै करै रूप से भोग।
रन का चढ़ना सहज है मुसकिल करना जोग॥
(१) सूरज। (२) अंधा। (३) सुमिरन। (४) कस्तूरी। (५) हाथी। (६) कुण्डलिन
नाड़ी का मुँह ऊपर करै।