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सर्वकोश
पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad

सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished116 पृष्ठ

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६४ कुंडलियां
जा की जैसी बूझ मारग सो तैसी हेरी ॥
फेर¹ खाय इक गये एक ठौ गये सिताबी ।
आखिर पहुँचे राह दिना दस भई खराबी ॥
पलटू एकै टेक ना जेतिक² भेष तै बाट ।
जैसे नदी एक है बहुतेरे हैं घाट ॥
( २३५ )
साध बचन साचा सदा जो दिल साचा होय ॥
जो दिल साचा होय रहै ना दुबिधा भागै ।
जो चाहै सो मिलै बात में बिलँब न लागै ॥
मन बचन कर्म लगाय संत की सेवा लावै ।
उकठा काठ बियास³ साच जो दिल में आवै ॥
जिनको है बिस्वास तेही को बचन फुरानी४ ।
हैगा उन का काम सन्त की महिमा जानी ॥
पलटू गाँठि में बाँधिये खाली पड़ै न कोय ।
साध बचन साचा सदा जो दिल साचा होय ॥
( २३६ )
महीं भुलाना फिरत हौं कि जगतै गया भुलाय ॥
जगतै गया भुलाय देखि सब हँसते हम कँह ।
उनकी करनी देखि हँसत हैं हमहूँ उन कँह ॥
बाय जोगी को जगत जगत को जोगी बाई ।
दोऊ को भौंसे आनि कहाँ अब तीसर पाई ॥
एक साहु सौ चोर चोर को साहु बनावै ।
जगत भगत से बैर अपनी दूनौ गावै ॥
पलटू तीसर है नहीं साखी भरै जो आय ।
महीं भुलाना फिरत हौं कि जगतै गया भुलाय ॥
(१) चक्कर । (२) जितने । (३) उगै । (४) सच्चा ।