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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 80

पद्मावत । ७६
सुनिकै शब्दै मण्डफ झंकारा । बैठो आय पूरब कें द्वारा ॥
पिंडे चढ़ाय छारै चित आंटी । माटी होय अन्त जो माटी ॥
दो० माटी मोल न कछुलहै, औ माटी सब मोल ।
दृष्टि जो माटी सो करै, माटी होय अमोल ॥
बैठि सिंह छाला होय तपा । पद्मावत पद्मावत जपा ॥
दृष्टि समाधि वही सों लगी । जेहि दर्शन कारण बैरागी ॥
किंगरी गँहे बजावे मूरी । भोर सांझ सुनिके नितैं पूरी ॥
कन्था जरै अगिन जनु लाये । बिरहँदँदौरैं जरत न बुझाये ॥
नयनराते निशि मारगै जागे । चंपै चकोर जानु शशि लागे ॥
कुण्डल गँहे शीशँ भुँइलावा । पांवरेँ होउँ जहां वै पावा ॥
जटा छोरके बार बहारों । जेहि पंथ आव शीश तहँवारों ॥
दो० चारहुचक्र फिरे मनखोजत, डंडै नरहँ थिर बार ।
होयके भस्म पवनँ सँगधाऊं, जहां सो प्रान अधार ॥
पद्मावत तहँ योगैं संयोगा । परी प्रेमवश गँहे बियोगी ॥
नींद न परी रयन जो आवे । सेज केवांच जानु कोइलावे ॥
दहै चन्द औ चन्दन चीरैं । दग्धै करै तन बिरह गँभीरूँ ॥
कल्पसमानै रयन ही बाढ़ी । तिलै तिल मरु युग युग परगाढ़ी ॥
गँहे बीन मगै रयन विहाँये । शशिवाहनै नितैं रहै उनाये ॥
पुनि धुनि संग और ही लागे । ऐसी बिथा रयन सब जागे ॥
आवाज़ १ चंदन २ बिभूति ३ निगाह ४-५ वास्ते ६ पकड़ना ७-१६-३६
हररोज़ ८ गुदड़ी ६ जंगल १० आंखलाल ११ रात १२-२६ राह १३-२०
आंख १४ चांद १५ शिर १७ खड़ाऊं १८ दरवाज़ा १६ न्योछावर २१ चारों
तरफ़ २२ घड़ी २३ क़ायम २४ हवा २५ अर्थात् फ़क़ीरी का हाल २६ लेना २७
दुख २८ जलना ३०-३२ कपड़ा ३१ भारी ३३ बराबर ३४ तिलके बराबर
कम और करन से ज्यादह ३५ पकड़ा ३६ शायद ३७ आख़िर ३८ हिरन
चांद के रथका ३६ हमेशा ४० आवाज़ ४१ ॥