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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 6

[Page-header] पद्मावत। २
नयनं नाहिं पै सबकुछ देखा । कौनभांति असजाय विशेखा॥
ना कोई है वह की रूपा। नावहरसो कोई आहि अनूपा॥
ना वह ठाउँ न वह बिनठाउँ। रूपरेख बिन निरमले नाउँ ॥
दो० ना वह मिला न बेहरा, ऐसो रहा भरिपूर ।
दृएवन्तै कहँ नेरे, अंधहि मूरख दूर ॥
और जो दीन्हेसिरतन अमोला। ताकर मर्म न जानै भोला ॥
दीन्हेसिरसना औ रसभोगू। दीन्हेसिदशनजो बिहँसे योगू
दीन्हेसिजग देखनकहँ नयनाँ। दीन्हेसि श्रवणैं सुनेकहँ बयनाँ॥
दीन्हेसिकण्ठ बोल जेहिमाहां। दीन्हेसि करपल्लव बरबाहां ॥
दीन्हेसिचरण अनूप चलाहीं। सोजानै जेहि दीन्हेसि नाहीं॥
यौवन मरम जानिपै बूढ़ा। मिला न तरुणा या जग ढूँढ़ा॥
सुख कर मरमै न जानै राजा। दुखीजानि जाकहँ दुख बाजा॥
दो० काया कामरमै जानिपै रोगी, भोगी रहै निचन्तै।
सबकर मरम गुसाँई जानै जो घटघट रहै तन्तै॥
अति अपार करताकर करनी। बरणन कोई पावै बरना ॥
सात स्वैरंग जो कागद करै। धरती समंदर मसै भरै ॥
जानवन्त जगसाखा बन ढांखा। जानवन्त कैरौँ रँदै नौँ पंख पांखा॥
जानवन्त खेहँ रहै दुनयाई। मेघैं बूंद औ गगन तंराई ॥
सब लिख नीकी लिख संसारा। लिखि न जायगतिसमुद्रअपारा॥
= आँख १ कौन तरह २ मुक़ाबिल जिसका कोई नहीं ३ जगह ४ पाक साफ़ ५
अलग ६ देखनेवाला ७ नादान ८ ज़वाहिर ६ भेद १० जीभ ११ दांत १२
हँसने के लिये १३ आँख १४ कान १५ आवाज़ १६ हाथ की अंगुली व
हथेली १७ पैर १८ जिसकी मिसाल न हो १६ जवानी २०-२२ क़दर २१ भेद २३
२५-२७ बदन २४ बेफ़िक्र २६ ईश्वर २८ जिसका पारावार न हो २६ बयान
करना ३० आसमान ३१ ज़मीन ३२ सियाही ३३ बाल ३४ दांत ३५ बालू ३६
माटी ३७ बादल ३८ आसमान ३६ नखत ४० ॥