पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । ३६
हँसत सुआ पुनि आय सुनारी । दीन्ह कसौटी औ पनवारी ॥
सुआ बॉनि तोरी कस सोना । सिंहलद्वीप तोर कस लोना ॥
कौन दृष्टि तोरे रूपमनी । वहिं हौं लोने कि वै पद्मिनी ॥
दो० जोन कहेसि सँत सोठाँ, तोहि राजाकी आने ।
है कोई यह जग महँ, मोरे रूप समाने ॥
सँवरिरूप पद्मावति केरा । हँसा सुआ रानी मुख हेरौं ॥
जेहिसरवरें महँ हंस न आवा । बगुला तहँ जल हंस कहावा ॥
दई कीन्ह अस जगतैं अनूपा । एक एकते आगर रूपा ॥
कै मन गर्व न छाजा काहू । चांद घटा और लाग्यो राहू ॥
लोनेँ बिलोने तहां को कहै । लोनी सोइ कंत जेहि चहै ॥
काहि पूँछ सिंहलकी नारी । दिनहिंनपूजैनिशि अँधियारी ॥
कनकें सुगन्ध सु तेहिंकी कायां । जहां माथ का बरणों पाया ॥
दो० गढ़ी सुसोने सोंधी, भरे सो रूपे भाग ।
सुनत रोष भइ रानी, हिये लोन असलाग ॥
जो यह सुआ मंदिरमहँ अहै । कोन होय राजा सों कहै ॥
सुनि राजा पुनि होय बियोगी । छांड़े राज चलै होय योगी ॥
विषराखे नहिं होत अँगूरू । शब्दे न दे बहुर हम चूरू ॥
धाँयै दामिनी बेगि हँकारी । वहसौंपाहिये रिसनसँभारी ॥
देखोयहसो ठाँ है मुंडचाली । भयो न ताकर जाकर पाला ॥
मुखकी आनि पेटबसआना । तेहि अवगुण दसहाटबिकाना ॥
चुनौती १ आवाज २ खूबसूरत ३-५-१६ निगाह ४ सच ६ तोता ७ क़सम ८
बराबर ६ देखना १० तालाव ११ दुनियाँ १२ वेमिसाल १३ गरूर १४ खूबसूरत
या बदसूरत १५ खाविन्द १७ राति १८-२१ सोना १६ बदन २० गुस्सा २१
दिल २२-२६ दुखी २३ आवाज़ २४ लौंडी २५ विजुली २६ जल्द २७ बोलाया
२८ तोता ३० बदराह ३१ ॥